अक्टूबर 28, 2026
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Israel Election Result: नेतन्याहू की पार्टी नंबर 1, पर सरकार किसकी बनेगी?

इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की आधिकारिक तस्वीर, पीछे इजराइल का झंडा

Israel Election Result: इजराइल में मंगलवार को हुए आम चुनाव के बाद पूरी रात आंकड़े ऊपर-नीचे होते रहे। सुबह तक तस्वीर इतनी साफ हुई कि प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की लिकुड पार्टी तीनों बड़े टीवी चैनलों के एग्जिट पोल और शुरुआती आधिकारिक गिनती, दोनों में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। पर असली सवाल अब भी खुला है कि सरकार कौन बनाएगा। 120 सीटों वाली संसद नेसेट में बहुमत के लिए 61 सीटें चाहिए, और फिलहाल कोई भी खेमा इस आंकड़े के करीब नहीं दिख रहा।

इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की आधिकारिक तस्वीर, पीछे इजराइल का झंडा
इजराइल के प्रधानमंत्री और लिकुड प्रमुख बेंजामिन नेतन्याहू (फाइल फोटो)। फोटो: Avi Ohayon / Government Press Office of Israel, Wikimedia Commons (CC BY-SA 3.0)

मुकाबला नेतन्याहू के दक्षिणपंथी-धार्मिक खेमे और पूर्व सेना प्रमुख गादी आइजनकोट की अगुवाई वाले विपक्षी खेमे के बीच है। मतदान खत्म होने के ठीक बाद आए पहले एग्जिट पोल में विपक्षी खेमा थोड़ा आगे दिखा था, लेकिन रात में अपडेट हुए सर्वे नेतन्याहू की तरफ झुक गए। BBC ने इसे ‘too close to call’ यानी इतना करीबी मुकाबला बताया है कि अभी किसी को विजेता कहना मुश्किल है।

रात भर पलटते रहे एग्जिट पोल

इजराइल में मतदान स्थानीय समय रात 10 बजे (भारतीय समय बुधवार तड़के 1:30 बजे) खत्म हुआ। Times of Israel के मुताबिक Channel 12 के पहले एग्जिट पोल में विपक्षी यहूदी पार्टियों के खेमे को 52 और नेतन्याहू खेमे को 50 सीटें मिलती दिख रही थीं, जबकि लिकुड को 24 सीटें। रात में आए अपडेट के बाद तस्वीर यह बनी:

एग्जिट पोल (अपडेटेड)नेतन्याहू खेमाआइजनकोट वाला विपक्षी खेमाअरब पार्टियां
Kan 11515118
Channel 12524919
Channel 13515118

अपडेटेड सर्वे में लिकुड को 27 सीटें और आइजनकोट की नई पार्टी ‘यशर’ (Yashar) को 21-22 सीटें मिलती दिख रही हैं। पिछली संसद में लिकुड के पास 32 सीटें थीं। 2022 के चुनाव के बाद नेतन्याहू ने कई धुर दक्षिणपंथी दलों के साथ मिलकर 64 सीटों की सरकार बनाई थी। यानी एग्जिट पोल सही निकले तो मौजूदा गठबंधन बहुमत से काफी नीचे आ जाएगा।

आधिकारिक गिनती भी शुरू हो चुकी है। इजराइली अखबार ynet के मुताबिक बुधवार तड़के तक करीब 12 लाख वोट गिने गए थे। इनमें लिकुड 23.4% वोटों के साथ सबसे आगे थी, यशर 15.7% के साथ दूसरे और नफ्ताली बेनेट की पार्टी ‘बेयाखद’ (B’Yachad) 8.5% के साथ तीसरे नंबर पर थी। ध्यान रहे, यह अधूरी गिनती है और गिने गए इलाके पूरे देश की तस्वीर नहीं हैं। सैनिकों के डबल-एनवेलप वोट सबसे आखिर में गिने जाते हैं, इसलिए अंतिम नतीजे शुक्रवार तक आ सकते हैं।

इजराइल की यशर पार्टी के प्रमुख और पूर्व सेना प्रमुख गादी आइजनकोट की तस्वीर
यशर पार्टी के प्रमुख और इजराइली सेना के पूर्व प्रमुख गादी आइजनकोट (फाइल फोटो, जून 2026)। फोटो: Yahav Trudler / गादी आइजनकोट का प्रवक्ता कार्यालय, Wikimedia Commons (CC BY-SA 3.0)

‘लिकुड सबसे बड़ी पार्टी’ बनाम ‘जनता ने बदलाव चुना’

नतीजों के रुझान आने के बाद दोनों नेताओं ने अपने-अपने तरीके से जीत का दावा किया। यरुशलम में समर्थकों से नेतन्याहू ने कहा, ‘लिकुड सबसे बड़ी पार्टी है। हमें एक मजबूत दक्षिणपंथी राष्ट्रीय सरकार बनानी होगी।’ उन्होंने यह भी कहा कि वे ‘असली नतीजों’ का इंतजार कर रहे हैं और इजराइल ऐसी सरकार से नहीं चल सकता जो ‘अरब समर्थन’ पर टिकी हो। उनके सहयोगी और विदेश मंत्री गिदोन सार ने विपक्ष के जश्न को ‘जल्दबाजी’ बताया।

उधर तेल अवीव में आइजनकोट ने समर्थकों से कहा, ‘हमने इतिहास रच दिया है। जनता ने बदलाव के पक्ष में फैसला किया है। इजराइल की जनता ने नेतन्याहू के कार्यकाल को आगे बढ़ाने के खिलाफ वोट दिया है।’ उन्होंने कहा कि इतने ऊंचे मतदान के बाद दोबारा चुनाव में जाना गलती होगी। विपक्ष के नेता यायर लपीद ने कहा कि नेतन्याहू खेमे को करारी हार मिली है।

आइजनकोट इजराइली सेना के पूर्व प्रमुख हैं। BBC के मुताबिक उन्होंने अपनी पार्टी पिछले साल ही बनाई और 7 अक्टूबर की सुरक्षा चूक की जवाबदेही को चुनावी मुद्दा बनाया। गाजा युद्ध के शुरुआती महीनों में उनके बेटे की मौत हो गई थी, जो सेना में थे। वे नेतन्याहू की वॉर कैबिनेट में रहे, पर 2024 में युद्ध को संभालने के तरीके से असहमति जताकर अलग हो गए।

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अरब पार्टियां बनेंगी किंगमेकर?

इस चुनाव की सबसे बड़ी कहानी अरब मतदाताओं की रिकॉर्ड भागीदारी है। एग्जिट पोल के मुताबिक अरब बहुल दो पार्टियां, जॉइंट लिस्ट और राम (Ra’am), मिलकर 17 से 19 सीटें जीत सकती हैं। पिछली संसद में इनके पास सिर्फ 10 सीटें थीं। अगर ऐसा हुआ तो यह इनका अब तक का सबसे अच्छा प्रदर्शन होगा। चुनाव आयोग के मुताबिक कुल मतदान 77.7% रहा, यानी करीब 56.96 लाख लोगों ने वोट डाला। 1999 के बाद इस समय तक का यह सबसे ऊंचा मतदान है।

इजराइल की बड़ी पार्टियां परंपरागत रूप से अरब पार्टियों को गठबंधन में लेने से बचती रही हैं। आइजनकोट अब तक कहते रहे हैं कि अरब पार्टियां उनके गठबंधन की शर्तों पर खरी नहीं उतरतीं। पर दोनों खेमों के बीच का अंतर इतना कम है कि ये पार्टियां किसी भी समीकरण में अहम हो सकती हैं। 2021 में राम पार्टी नफ्ताली बेनेट और यायर लपीद की गठबंधन सरकार का हिस्सा रह चुकी है, जो करीब एक साल चली थी।

आगे क्या: राष्ट्रपति के पास जाएगी गेंद

नतीजे आने के बाद राष्ट्रपति इसहाक हर्जोग सभी पार्टियों के नेताओं से बात करेंगे और उस नेता को सरकार बनाने का न्योता देंगे जिसके पास सबसे अच्छा मौका दिखे। उस नेता के पास गठबंधन बनाने के लिए 28 दिन होंगे, जिन्हें 14 दिन और बढ़ाया जा सकता है। नाकाम रहने पर दूसरे नेता को मौका मिलता है, और आखिर में बात दोबारा चुनाव तक जा सकती है। 2019 से 2022 के बीच इजराइल में ऐसे ही गतिरोध की वजह से पांच चुनाव हुए थे।

Times of Israel के मुताबिक नेतन्याहू सबसे बड़ी पार्टी के नेता और आइजनकोट सबसे बड़े खेमे के नेता के तौर पर राष्ट्रपति से पहला मौका मांग सकते हैं। इजराइली विश्लेषक कई रास्तों की चर्चा कर रहे हैं: अरब पार्टियों के बाहरी समर्थन से अल्पमत सरकार, नेतन्याहू और आइजनकोट की ‘यूनिटी सरकार’, या किसी एक खेमे से कोई पार्टी टूटकर दूसरे में चली जाए। BBC के मुताबिक लगभग हर रास्ते में किसी न किसी को अपना चुनावी वादा तोड़ना पड़ सकता है।

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भारत के लिए क्यों अहम है यह नतीजा

भारत-इजराइल रिश्तों में नेतन्याहू का दौर खास रहा है। फरवरी 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 25-26 फरवरी को इजराइल की यात्रा पर गए थे और नेसेट को संबोधित करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बने। प्रधानमंत्री कार्यालय के मुताबिक इसी यात्रा में दोनों देशों ने रिश्तों को ‘स्पेशल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप’ का दर्जा दिया।

फरवरी 2026 में इजराइल यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बेंजामिन नेतन्याहू हाथ मिलाते हुए
25 फरवरी 2026 को इजराइल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बेंजामिन नेतन्याहू की मुलाकात (फाइल फोटो)। फोटो: प्रधानमंत्री कार्यालय/PIB, Wikimedia Commons (GODL-India)

उस यात्रा के संयुक्त बयान में तय हुआ था कि अगले पांच साल में 50,000 तक अतिरिक्त भारतीय कामगार इजराइल जा सकते हैं। UPI को इजराइल के पेमेंट सिस्टम से जोड़ने के लिए NPCI इंटरनेशनल और MASAV के बीच समझौता हुआ और मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की बातचीत तेज करने पर सहमति बनी। सितंबर 2025 में दोनों देश द्विपक्षीय निवेश समझौते पर भी दस्तखत कर चुके हैं। नई सरकार किसी की भी बने, इन समझौतों को आगे बढ़ाने की रफ्तार उसी पर निर्भर करेगी।

पश्चिम एशिया की स्थिति भी भारत के लिए अहम है। समर्थकों को संबोधित करते हुए नेतन्याहू ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ इजराइल के पास ईरान के खतरे को ‘हमेशा के लिए’ खत्म करने का ‘अनोखा मौका’ है। हालांकि BBC से बात करने वाले जानकारों का मानना है कि सरकार नेतन्याहू की बने या आइजनकोट की, ईरान युद्ध में इजराइल की मौजूदा दिशा बदलने की संभावना कम है।

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