अक्टूबर 26, 2026
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Agniveer First Batch: 18,300 की विदाई, हाथ में ₹11.71 लाख; आगे क्या?

INS चिल्का के परेड ग्राउंड पर कतारों में खड़े नौसेना के पहले बैच के अग्निवीर

Agniveer First Batch: चार साल पहले जिन युवाओं ने अग्निपथ योजना के तहत पहली बार सेना की वर्दी पहनी थी, उनकी विदाई का वक्त आ गया है। हिंदुस्तान टाइम्स ने मामले की जानकारी रखने वाले अधिकारियों के हवाले से बताया है कि पहले बैच के 18,000 से ज्यादा अग्निवीर 31 दिसंबर तक थल सेना, वायुसेना और नौसेना से बाहर हो जाएंगे। चार साल का कार्यकाल पूरा करने वाले ये जवान तब 21.5 से 25 साल की उम्र के बीच होंगे, यानी ज्यादातर के सामने दूसरी नौकरी की तलाश अभी बाकी है।

INS चिल्का के परेड ग्राउंड पर कतारों में खड़े नौसेना के पहले बैच के अग्निवीर
मार्च 2023 में INS चिल्का (ओडिशा) के परेड ग्राउंड पर नौसेना के पहले बैच के अग्निवीर (फाइल फोटो)। फोटो: PIB / भारतीय नौसेना

अखबार के मुताबिक पहले दौर में तीनों सेनाओं में करीब 24,400 अग्निवीर भर्ती हुए थे। इनमें थल सेना में करीब 19,000, वायुसेना में 2,850 और नौसेना में 2,550 थे। नियम के मुताबिक हर बैच के ज्यादा से ज्यादा 25% अग्निवीरों को ही स्थायी कैडर में लिया जा सकता है, इसलिए करीब तीन-चौथाई, यानी लगभग 18,300 अग्निवीर अब नागरिक जीवन में लौटेंगे। अधिकारियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि रिलीज नवंबर के मध्य से चरणों में होगी। सबसे पहले नौसेना, फिर वायुसेना और आखिर में थल सेना अपने अग्निवीरों को रिलीज करेगी।

जाते वक्त हाथ में कितना पैसा

14 जून 2022 को केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी के बाद PIB की ओर से जारी ब्योरे के मुताबिक अग्निवीर की मासिक तनख्वाह का 30% हिस्सा ‘अग्निवीर कॉर्पस फंड’ में जमा होता है और सरकार भी उतनी ही रकम अपनी ओर से डालती है। चार साल में दोनों का योगदान 5.02-5.02 लाख रुपये बनता है। ब्याज जोड़कर कार्यकाल पूरा होने पर करीब 11.71 लाख रुपये ‘सेवा निधि’ के रूप में एकमुश्त मिलते हैं, जिस पर इनकम टैक्स नहीं लगता।

सालमासिक पैकेजहाथ में (70%)कॉर्पस फंड में अग्निवीर का हिस्सा (30%)सरकार का योगदान
पहला₹30,000₹21,000₹9,000₹9,000
दूसरा₹33,000₹23,100₹9,900₹9,900
तीसरा₹36,500₹25,580₹10,950₹10,950
चौथा₹40,000₹28,000₹12,000₹12,000
स्रोत: PIB, 14 जून 2022। जोखिम और कठिनाई भत्ते इसके अलावा मिलते हैं।

लेकिन इस रकम के साथ एक बड़ी शर्त भी है। PIB के उसी ब्योरे के मुताबिक अग्निवीरों को ग्रेच्युटी और पेंशन का हक नहीं है। कार्यकाल के दौरान उन्हें 48 लाख रुपये का बिना अंशदान वाला जीवन बीमा कवर मिलता है। हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक पुरानी व्यवस्था में भर्ती जवान करीब 20 साल नौकरी करके 30 के दशक के आखिर में पेंशन, स्वास्थ्य सुविधा और कैंटीन जैसी सुविधाओं के साथ रिटायर होते हैं, जो चार साल बाद लौटने वाले अग्निवीरों को नहीं मिलेंगी।

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CAPF में आधी सीटें, उम्र और फिजिकल में छूट

दूसरी नौकरी के मोर्चे पर सबसे बड़ा रास्ता केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) का है। गृह मंत्रालय ने 21 जुलाई 2026 को लोकसभा में एक लिखित जवाब में बताया था कि CAPF में कांस्टेबल (जनरल ड्यूटी) और असम राइफल्स में राइफलमैन की भर्ती में ‘पूर्व अग्निवीर’ की नई श्रेणी बनाई गई है। इसमें 50% पद पूर्व अग्निवीरों के लिए आरक्षित हैं।

गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय के उसी जवाब के मुताबिक पूर्व अग्निवीरों को ऊपरी आयु सीमा में तीन साल की छूट मिलेगी, जबकि पहले बैच के लिए यह छूट पांच साल की है। उन्हें फिजिकल स्टैंडर्ड टेस्ट (PST), फिजिकल एफिशिएंसी टेस्ट (PET) और लिखित परीक्षा से भी छूट दी गई है। मंत्रालय में पूर्व अग्निवीरों की आगे की राह के तालमेल के लिए एक अलग ‘एक्स-अग्निवीर विंग’ भी बनाया गया है। इससे पहले दिसंबर 2025 में गृह मंत्रालय ने गजट अधिसूचना जारी कर BSF कांस्टेबल भर्ती में पूर्व अग्निवीरों का कोटा 10% से बढ़ाकर 50% किया था।

हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक पूर्व अग्निवीरों को CAPF के अलावा राज्य पुलिस, भारतीय रेलवे, तटरक्षक बल और रक्षा क्षेत्र की 16 सरकारी कंपनियों में भी नौकरी के कोटे का फायदा मिलेगा। हरियाणा, राजस्थान और महाराष्ट्र जैसे राज्य अपनी पुलिस में अग्निवीरों के लिए मौके का एलान कर चुके हैं। चूंकि अग्निवीरों की ट्रेनिंग मुख्य रूप से युद्ध के लिए हुई है, इसलिए CAPF से आंतरिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था की ड्यूटी के लिए अलग ट्रेनिंग मॉड्यूल तैयार करने को कहा गया है।

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नौसेना का वह बैच, जो सबसे पहले लौटेगा

रिलीज की शुरुआत जिस नौसेना से होनी है, उसके पहले बैच की ट्रेनिंग ओडिशा के INS चिल्का में हुई थी। PIB के मुताबिक नवंबर 2022 में ट्रेनिंग शुरू करने वाले इसी बैच के साथ नौसेना ने पहली बार महिलाओं को भी अग्निवीर के रूप में भर्ती किया। 28 मार्च 2023 को 16 हफ्ते की ट्रेनिंग के बाद 272 महिलाओं समेत 2,585 अग्निवीरों की पासिंग आउट परेड हुई थी, जिसकी सलामी तब के नौसेना प्रमुख एडमिरल आर. हरि कुमार ने ली थी। यह देश के किसी भी ट्रेनिंग संस्थान से अग्निवीरों की पहली पासिंग आउट परेड थी।

INS चिल्का में अग्निवीरों की पासिंग आउट परेड का निरीक्षण करते तत्कालीन नौसेना प्रमुख एडमिरल आर. हरि कुमार
28 मार्च 2023 को INS चिल्का में पहले बैच के अग्निवीरों की पासिंग आउट परेड का निरीक्षण करते तत्कालीन नौसेना प्रमुख एडमिरल आर. हरि कुमार (फाइल फोटो)। फोटो: PIB / भारतीय नौसेना

25% का दायरा बढ़ेगा?

कौन-से 25% अग्निवीर स्थायी होंगे, यह PIB के मुताबिक सेनाओं की जरूरत और चार साल के प्रदर्शन के आधार पर केंद्रीकृत तरीके से तय होता है, और यह फैसला पूरी तरह सेनाओं के हाथ में है। स्थायी कैडर में चुने गए अग्निवीरों को कम से कम 15 साल और सेवा देनी होगी। हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक थल सेना अग्निवीरों का आकलन ऑपरेशनल योग्यता, हथियार चलाने की दक्षता, शारीरिक फिटनेस और दूसरे सैन्य कौशल की परीक्षाओं के आधार पर करती है।

अधिकारियों के हवाले से अखबार ने यह भी लिखा है कि तीनों सेनाएं अलग-अलग भूमिकाओं में अग्निवीरों के प्रदर्शन से संतुष्ट हैं और आगे चलकर योजना में ऐसा बदलाव हो सकता है, जिससे खास तकनीकी कौशल वाले ज्यादा अग्निवीरों को सेना में रोका जा सके। हालांकि इस पर अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। फिलहाल थल सेना में करीब 2.7 लाख, वायुसेना में करीब 27,000 और नौसेना में करीब 21,000 अग्निवीर हैं।

2022 में घोषणा के वक्त से ही अग्निपथ योजना राजनीतिक बहस का मुद्दा रही है, क्योंकि यह जवानों का कार्यकाल घटाती है और उन्हें पुरानी व्यवस्था से कम सेवा लाभ देती है। सरकार का तर्क रहा है कि इससे सेनाओं की औसत उम्र घटेगी और समाज को अनुशासित, प्रशिक्षित युवा मिलेंगे। पहले बैच की विदाई अब यह परखेगी कि सेवा निधि और नौकरी के कोटे जमीन पर कितने कारगर साबित होते हैं।

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(रिलीज का समय और संख्या हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट पर आधारित हैं, जिसने नाम न बताने वाले अधिकारियों का हवाला दिया है। रक्षा मंत्रालय की ओर से आधिकारिक घोषणा होने पर यह खबर अपडेट की जाएगी।)

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