Bihar Teacher Scam: जो टीचर थी ही नहीं, उसके खाते में भेजे ₹98 लाख

Bihar Teacher Scam: कागजों में एक शिक्षिका थी, उसका PRAN नंबर था, बैंक खाता था और हर महीने उसकी सैलरी भी जा रही थी। बस वह शिक्षिका कभी किसी स्कूल में थी ही नहीं। बिहार शिक्षा विभाग की आंतरिक ऑडिट रिपोर्ट में भागलपुर का यह मामला दर्ज है, जिसमें ऐसी ही एक काल्पनिक शिक्षिका के नाम पर करीब ₹98 लाख का अनधिकृत भुगतान होने का आरोप है। यह इकलौता मामला नहीं है। नवादा और पटना में भी वेतन पोर्टल से छेड़छाड़ कर लाखों रुपये निकाले जाने के आरोप हैं।

The Indian Express की 29 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक विभाग के ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट सिस्टम (HRMS) पोर्टल के आंतरिक ऑडिट में नवादा, भागलपुर और पटना के तीन मामलों का ब्योरा दर्ज है। इनमें वेतन रिकॉर्ड में हेराफेरी, लॉगिन आईडी के गलत इस्तेमाल और ऐसे शिक्षकों के नाम पर भुगतान के आरोप हैं, जो असल में मौजूद ही नहीं थे। शिकायतों और रिपोर्टों में दर्ज रकम जोड़ें तो तीनों मामलों में करीब ₹1.85 करोड़ की गड़बड़ी का आरोप बनता है। सभी मामलों में पुलिस जांच और विभागीय कार्रवाई शुरू हो चुकी है और कम से कम चार अधिकारी-कर्मचारी निलंबित किए गए हैं।
भागलपुर: स्कूल में ‘तनुश्री’ नाम की कोई शिक्षिका नहीं
सबसे चौंकाने वाला मामला भागलपुर का है। The Indian Express के मुताबिक यहां ‘तनुश्री’ नाम की एक काल्पनिक शिक्षिका के नाम पर कई महीनों में ₹98,12,773 का अनधिकृत भुगतान हुआ। इस मामले में जिला शिक्षा पदाधिकारी को निलंबित किया गया और 8 अक्टूबर को जोगसर थाने में केस दर्ज हुआ। शिक्षा विभाग के निदेशक (प्रशासन) के 21 अक्टूबर के आदेश के मुताबिक HRMS पोर्टल से एक काल्पनिक शिक्षक के नाम पर भुगतान के आरोप में जिले के एक डीपीओ पर भी 8 अक्टूबर को केस दर्ज हुआ और अगले दिन उनकी गिरफ्तारी हुई।
TV9 हिंदी की 9 अक्टूबर की रिपोर्ट बताती है कि यह खेल चला कैसे। आरोप है कि जिला शिक्षा कार्यालय की स्थापना शाखा में तैनात रहे एक संविदा कंप्यूटर ऑपरेटर ने किसी अज्ञात व्यक्ति के पैन कार्ड से ‘तनुश्री’ के नाम पर PRAN नंबर बनवाया और उसी के आधार पर बैंक खाता खुलवाया। हर महीने असली शिक्षकों का वेतन बिल ट्रेजरी भेजते समय फाइल में चुपचाप यह नाम और खाता नंबर जोड़ दिया जाता था। रिपोर्ट के मुताबिक मई 2025 से जुलाई 2026 के बीच करीब ₹52 लाख इस खाते में गए और निकाल लिए गए।
अगस्त 2026 में इसी खाते में ₹46 लाख और भेजे गए, लेकिन असामान्य लेन-देन देखकर बैंक ने खाता होल्ड कर दिया। इसके बाद ₹73 लाख भेजने की कोशिश हुई, जिसे बैंक ने लौटा दिया और यहीं से पूरा मामला खुल गया। संबंधित स्कूल के प्रधानाध्यापक ने हलफनामा देकर बताया कि उनके यहां इस नाम की कोई शिक्षिका कभी नियुक्त ही नहीं हुई। प्रमंडलीय शिक्षा उपनिदेशक ने 6 नामजद लोगों पर FIR दर्ज होने की पुष्टि की है।
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नवादा: ₹46,772 की सैलरी बन गई ₹4.91 लाख
नवादा का मामला 13 अक्टूबर को टाउन थाने में दर्ज FIR से सामने आया। जिला शिक्षा पदाधिकारी की शिकायत में रजौली प्रखंड के बेलाडीह की एक प्राथमिक शिक्षिका, पोर्टल पर ‘मेकर’ की भूमिका वाले एक क्लर्क और ‘चेकर’ की भूमिका वाले हेड क्लर्क को आरोपी बनाया गया है। FIR के मुताबिक अप्रैल 2025 के लिए प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (BEO) ने शिक्षिका का कुल मासिक वेतन ₹46,772 मंजूर किया था। लेकिन ‘अन्य भत्ते’ के नाम पर ₹4,52,222 जोड़कर उस महीने ₹4,91,772 का भुगतान कर दिया गया।
मई 2025 में भी ₹46,772 का वेतन मंजूर हुआ, पर भुगतान ₹3,49,500 का हुआ। FIR में यह भी दर्ज है कि समग्र शिक्षा फंड से शिक्षिका के खाते में ₹2,86,000 भेजे गए, जबकि यह रकम उनके वेतन का हिस्सा थी ही नहीं। कुल मिलाकर ₹10,43,950 के अनधिकृत भुगतान का आरोप है। जांचकर्ताओं ने शिक्षिका के खाते से 20 मई 2025 को एक दूसरे खाते में भेजे गए ₹1 लाख का भी जिक्र किया है और शक जताया है कि वह खाता चेकर का हो सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक इस लिंक की अभी पुष्टि होनी है। जांचकर्ताओं ने लिखा है कि ₹10 लाख का अतिरिक्त भुगतान ‘क्लर्क की गलती नहीं हो सकता’।

पटना: HRA 20% की जगह 200%
पटना में मामला महालेखाकार (AG), बिहार के ऑडिट में पकड़ा गया। Times of India के मुताबिक गुलजारबाग के एक हायर सेकेंडरी स्कूल के क्लर्क पर आरोप है कि उसने जिला शिक्षा कार्यालय की ‘मेकर’ लॉगिन आईडी का इस्तेमाल कर अतिरिक्त वेतन और मकान किराया भत्ता (HRA) निकलवाया। 2024 से 2025 के बीच HRA 20% की जगह 200% दर्ज किया गया। कुल अतिरिक्त भुगतान ₹76,71,983 का है, जिसमें से ₹62.48 लाख क्लर्क और ₹14.24 लाख एक परिचारी के खाते में गए।
जिला शिक्षा पदाधिकारी ने 14 अक्टूबर को क्लर्क को निलंबित कर दिया। परिचारी भी निलंबित है और दो अन्य क्लर्कों पर विभागीय कार्रवाई की सिफारिश हुई है। बहादुरपुर थाने में FIR दर्ज है। आरोपी पक्ष की ओर से रिपोर्ट के मुताबिक पूरी रकम नौ चेक के जरिए 20 अगस्त को ट्रेजरी में लौटा दी गई थी, हालांकि ब्याज की मांग अभी बकाया है। क्लर्क ने अपने लिखित जवाब में कहा है कि उन्हें नहीं पता कि यह रकम उनके वेतन खाते में कैसे आई। मामले में अभी जांच जारी है और किसी आरोपी पर दोष साबित नहीं हुआ है।
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मेकर, चेकर, अप्रूवर: कहां टूटी कड़ी?
बिहार में शिक्षा विभाग के कर्मचारियों का वेतन बिल HRMS पोर्टल पर तीन स्तरों पर बनता है: मेकर, चेकर और अप्रूवर। इसके बाद भुगतान कॉम्प्रिहेंसिव फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम (CFMS) से होता है। PTI के मुताबिक वित्त विभाग के प्रधान सचिव विनय कुमार ने 9 अक्टूबर की चिट्ठी में शिक्षा विभाग से कहा कि अगले महीने का वेतन जारी करने से पहले सभी अधिकारियों, शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों के वेतन-भत्तों की वरिष्ठ अधिकारियों से जांच अनिवार्य होगी।
चिट्ठी में यह भी लिखा है कि किसी भी स्तर पर गड़बड़ी के लिए जिम्मेदार मेकर, चेकर या अप्रूवर पर अनुशासनात्मक कार्रवाई हो और ज्यादा भुगतान की वसूली की जाए। वेतन बनाने का काम सिर्फ नियमित अधिकारियों और कर्मचारियों को देने को कहा गया है। उपमुख्यमंत्री और वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने पत्रकारों से कहा था कि नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) ने शिक्षा विभाग में वेतन बिलों की प्रोसेसिंग में अनियमितताएं पकड़ी थीं, जिसके बाद यह निर्देश दिया गया। विभाग में छह लाख से ज्यादा शिक्षक और कर्मचारी हैं, इसलिए इस जांच से कई लोगों का वेतन देर से आने की आशंका भी जताई गई है।
सरकार क्या कह रही है?
शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने The Indian Express से कहा (अनुवाद), “मैंने अधिकारियों से नवंबर के मध्य तक आंतरिक ऑडिट पूरा करने को कहा है। HRMS सिस्टम में हेराफेरी रोकने के लिए विशेषज्ञों की मदद भी ली जा रही है। तीन केस स्टडी के नतीजे गंभीर चिंता पैदा करते हैं और इनसे हमें ऑनलाइन भुगतान की बेहतर व्यवस्था बनाने की जरूरत महसूस हुई है। भ्रष्ट शिक्षकों और अधिकारियों पर हमारी कार्रवाई जारी रहेगी।” मंत्री के मुताबिक राज्य के सभी 38 जिलों का ऑडिट हो रहा है।
यानी अभी सामने आए तीन मामले शुरुआती तस्वीर भर हैं। सवाल यह है कि जब एक काल्पनिक शिक्षिका सवा साल तक वेतन पाती रही और बैंक के रोकने पर ही मामला खुला, तो बाकी जिलों के ऑडिट में क्या निकलेगा। इसका जवाब नवंबर के मध्य तक आने की उम्मीद है।
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