Train Charging Rule: रात 11 से सुबह 5 बजे तक ट्रेन में मोबाइल चार्जिंग बंद

Train Charging Rule: अगर आप रात की ट्रेन में सोने से पहले फोन चार्जिंग पर लगाकर छोड़ देते हैं, तो अब यह आदत बदलनी पड़ेगी। रेलवे बोर्ड ने सभी जोनल रेलवे को सख्त निर्देश दिया है कि ट्रेनों के कोच में लगे मोबाइल और लैपटॉप चार्जिंग पॉइंट रात 11 बजे से सुबह 5 बजे तक हर हाल में बंद रखे जाएं। बोर्ड ने साफ लिखा है कि इसमें किसी तरह की छूट नहीं दी जाएगी।

यह सख्ती एक घटना के बाद आई है। Hindustan Times की रिपोर्ट के मुताबिक 24 अक्टूबर को तड़के करीब 3:38 बजे 12809 मुंबई-हावड़ा मेल के एक AC कोच में चार्जिंग पर लगा एक यात्री का पावर बैंक फट गया, उसमें आग लगी और कोच में धुआं भर गया। ओडिशा में बंडामुंडा स्टेशन के पास ट्रेन को करीब 15 मिनट रोकना पड़ा और 3:53 बजे वह आगे रवाना हुई।
रेलवे बोर्ड की चिट्ठी में क्या लिखा है?
रेलवे बोर्ड ने 26 अक्टूबर को सभी जोनल रेलवे के प्रिंसिपल चीफ मैकेनिकल इंजीनियरों को चिट्ठी भेजी है। समाचार एजेंसी PTI के मुताबिक इसमें बोर्ड ने माना कि दक्षिण पूर्व रेलवे (SER) में ऑनबोर्ड स्टाफ ने तय समय में चार्जिंग पॉइंट बंद नहीं किए थे और इसी दौरान चार्जिंग पर लगा पावर बैंक धुएं के साथ फट गया।
चिट्ठी में बोर्ड ने कहा है (अनुवाद), “सभी जोनल रेलवे संबंधित स्टाफ को जरूरी निर्देश जारी करें, ताकि मोबाइल चार्जिंग पॉइंट रात 11 बजे से सुबह 5 बजे तक हर हाल में बंद रहें। इस मामले में किसी तरह की छूट नहीं दी जानी चाहिए।” बोर्ड ने स्टाफ को इसके लिए समझाने और ट्रेनिंग देने को कहा है। साथ ही अफसरों और सुपरवाइजरों के स्तर पर सरप्राइज इंस्पेक्शन करने का भी निर्देश दिया है, ताकि नियम का पालन सच में हो।

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नियम नया नहीं, 2014 से है
दरअसल यह नियम पहली बार नहीं आया है। रेलवे बोर्ड ने 19 जून 2014 को ही रात में चार्जिंग पॉइंट बंद करने का आदेश दे दिया था। यह फैसला 2013 में हजूर साहिब नांदेड़-KSR बेंगलुरु एक्सप्रेस के AC थ्री-टियर कोच में लगी आग के बाद रेलवे सुरक्षा आयुक्त (CRS), दक्षिणी सर्किल की सिफारिश पर लिया गया था। CRS ने AC कोचों में रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक चार्जिंग पॉइंट बंद रखने की सलाह दी थी, लेकिन बोर्ड ने सुरक्षा और यात्रियों की सुविधा, दोनों का ध्यान रखते हुए इसे रात 11 से सुबह 5 बजे तय किया। तब AC कोचों में तय जगहों पर इसकी जानकारी वाले स्टिकर लगाने को भी कहा गया था।
यानी नियम कागज पर 12 साल से मौजूद है, लेकिन कई रूट पर इसका पालन ढीला पड़ गया था। इसी साल 6 मार्च को दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR) ने भी अपने डिवीजनों को ऐसे ही निर्देश दिए थे। PTI के मुताबिक SECR ने लिखा था कि नागपुर डिवीजन से गुजरने वाली ट्रेनों के AC कोचों में चार्जिंग पॉइंट अक्सर पूरी रात चालू रहते हैं, जो बोर्ड के आदेश का उल्लंघन है। SECR ने चेताया था कि रात में बिना निगरानी चार्ज हो रहे डिवाइस से आग का खतरा रहता है और यात्रियों के मोबाइल चोरी होने की आशंका भी बढ़ जाती है।
स्लीपर कोच का क्या?
2014 का आदेश AC कोचों के लिए था। नवंबर 2023 में उत्तर मध्य रेलवे के प्रयागराज डिवीजन में सराय भोपत-इटावा सेक्शन पर नई दिल्ली-दरभंगा हमसफर क्लोन स्पेशल के स्लीपर कोच में आग लगी थी, जो आसपास के कोचों तक फैल गई थी। इसके बाद CRS ने सिफारिश की थी कि AC कोचों की तरह स्लीपर कोचों में भी रात में चार्जिंग पॉइंट बंद किए जाएं।
PTI के मुताबिक रेलवे बोर्ड ने इस पर अपनी एक्शन टेकन रिपोर्ट में कहा था कि AC कोचों में तय घंटों के दौरान चार्जिंग पॉइंट पहले से बंद किए जा रहे हैं, जबकि नॉन-AC कोचों में इसे लागू कराने के लिए स्टाफ तैनात करना भारी खर्च की वजह से व्यावहारिक नहीं है। ताजा चिट्ठी की जो जानकारी सामने आई है, उसमें स्लीपर कोचों के लिए अलग से कोई नई व्यवस्था का जिक्र नहीं है।

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पावर बैंक से बढ़ रहा खतरा
मुंबई-हावड़ा मेल अकेली घटना नहीं है। Hindustan Times के मुताबिक पिछले हफ्ते मुंबई की एक AC लोकल ट्रेन में भी एक यात्री का पावर बैंक फट गया था। बंद कोच में आग या धुआं रात के वक्त और खतरनाक हो जाता है, जब ज्यादातर यात्री सो रहे होते हैं। 2013 और 2023 की घटनाओं के बाद CRS की सिफारिशें भी इसी खतरे की ओर इशारा करती हैं।
रात के सफर में यात्री क्या करें?
- रात 11 बजे से पहले ही फोन, लैपटॉप और पावर बैंक पूरी तरह चार्ज कर लें। लंबे सफर में पहले से चार्ज किया हुआ अच्छी क्वालिटी का पावर बैंक साथ रखें।
- डिवाइस को चार्जिंग पर लगाकर सोएं नहीं और उसे बर्थ के गद्दे या कपड़ों के नीचे दबाकर चार्ज न करें।
- फूला हुआ, ज्यादा गर्म होने वाला या सस्ता लोकल पावर बैंक सफर में इस्तेमाल न करें।
- कोच में धुआं, जलने की गंध या चिंगारी दिखे तो तुरंत कोच अटेंडेंट या TTE को बताएं। रेल मदद हेल्पलाइन 139 पर भी शिकायत की जा सकती है।
दिवाली और छठ पर ट्रेन से घर जाने की तैयारी कर रहे लाखों यात्रियों के लिए यह जानकारी अहम है। रात 11 बजे के बाद सॉकेट में बिजली न मिले, तो इसे खराबी न समझें। यह रेलवे का सुरक्षा नियम है, जिसे अब सख्ती से लागू कराया जा रहा है।
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