CBFC Data Leak: 500+ फिल्मों की स्क्रिप्ट-डील ऑनलाइन, अपलोडर ने छिपाई पहचान

CBFC Data Leak: फिल्म रिलीज से पहले सेंसर बोर्ड के पास जमा होने वाले जिन दस्तावेजों को फिल्मकार गोपनीय मानकर जमा करते हैं, वे कई दिनों तक इंटरनेट पर किसी के भी डाउनलोड करने के लिए खुले पड़े रहे। अंग्रेजी अखबार द हिंदू की पड़ताल के मुताबिक केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) से जुड़े 500 से ज्यादा टाइटल्स के आवेदन दस्तावेज ऑनलाइन मिले, जिनमें दर्जनों फीचर फिल्में शामिल हैं। इनमें शूटिंग स्क्रिप्ट, सेंसर बोर्ड के कट ऑर्डर और फिल्मों के डिस्ट्रीब्यूशन समझौते तक थे।

द हिंदू के रिपोर्टर अरून दीप की रिपोर्ट के मुताबिक यह लीक CBFC के ई-सिनेप्रमाण (e-Cinepramaan) पोर्टल से जुड़ा लगता है। करीब एक दशक पहले बोर्ड का कामकाज डिजिटल करने के लिए शुरू किए गए इसी पोर्टल पर फिल्मकार सर्टिफिकेट के लिए आवेदन और दस्तावेज जमा करते हैं। लीक हुए रिकॉर्ड दिसंबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच के हैं। राहत की बात यह है कि किसी फिल्म की वीडियो फाइल लीक नहीं हुई, क्योंकि फिल्में आमतौर पर अलग से जमा की जाती हैं।
यह भी पढ़ें: Vehicle Data Leak: ₹5 में गाड़ी नंबर से नाम-पता-मोबाइल? CERT-In करेगा ऑडिट
फाइलों में क्या-क्या था
रिपोर्ट के मुताबिक लीक दस्तावेजों में शूटिंग स्क्रिप्ट थीं, जिनमें हर शॉट का ब्योरा, अनुवाद और टिप्पणियां दर्ज थीं। ये स्क्रिप्ट खास तौर पर सेंसर बोर्ड की समीक्षा के लिए तैयार की गई लगती हैं। एक स्क्रिप्ट में तो पूरी फिल्म में आने वाली गालियों तक को अलग से चिह्नित किया गया था।
इनके अलावा CBFC की ओर से सुझाए गए कट्स का सारांश भी इन फाइलों में था। दिलचस्प यह है कि सिनेमैटोग्राफ एक्ट, 1952 की धारा 5A(2) के तहत यह जानकारी वैसे भी सार्वजनिक होनी चाहिए, लेकिन द हिंदू के मुताबिक बोर्ड की वेबसाइट पर यह हिस्सा “अंडर मेंटेनेंस” का संदेश दिखा रहा है।
सबसे संवेदनशील: लाइसेंस सौदों की रकम
अखबार के मुताबिक सबसे संवेदनशील दस्तावेज फिल्मों के डिस्ट्रीब्यूशन समझौते थे। इनमें विदेशी फिल्मों को भारत में रिलीज करने के समझौते भी थे और भारतीय फिल्मकारों की ओर से दूसरे राज्यों में डब वर्जन रिलीज करने की मंजूरी वाले कागज भी। कम से कम तीन समझौतों में फिल्म को भारत में रिलीज करने के लाइसेंस के लिए चुकाई गई रकम या तो छिपाई ही नहीं गई थी या ठीक से नहीं छिपाई गई थी। द हिंदू ने इन रकमों का खुलासा नहीं किया है।
इंडिया टुडे और द प्रिंट की रिपोर्टों के मुताबिक, द हिंदू ने जिन फिल्मों के समझौतों का जिक्र किया, उनमें ऑस्कर नामांकन पाने वाली ब्राजील की फिल्म ‘द सीक्रेट एजेंट’ और हॉलीवुड फिल्म ‘गुड लक, हैव फन, डोंट डाई’ शामिल हैं।
कानूनी जानकार इसे फिल्म कारोबार के लिए बड़ा जोखिम मान रहे हैं। वेरम लीगल की मैनेजिंग पार्टनर वसुंधरा एस. ने द हिंदू से कहा कि फिल्म उद्योग के व्यावसायिक समझौतों में क्रिएटिव कंट्रोल, कास्टिंग, मेहनताना, मुनाफे में हिस्सेदारी और बौद्धिक संपदा अधिकार जैसी बारीक शर्तें होती हैं, और इनके सार्वजनिक होने से मोलभाव की स्थिति कमजोर हो सकती है। दिल्ली के कमर्शियल वकील अभिनव हंसरामन के मुताबिक, कोई प्रतिद्वंद्वी अब यह जानकर कहीं बेहतर तरीके से मोलभाव कर सकता है कि किसी कंपनी ने खास तरह की फिल्मों के लिए पहले कौन-सी शर्तें मानी थीं।
रूसी लिपि में लिखा था पूर्व चेयरमैन का नाम
द हिंदू के मुताबिक ये दस्तावेज ‘डॉकेट’ की शक्ल में गैर-लाभकारी डिजिटल लाइब्रेरी इंटरनेट आर्काइव पर अपलोड किए गए थे, और इनमें फिल्म की कॉपी के सिवा लगभग सब कुछ था। ज्यादातर फाइलें इसी महीने की शुरुआत में, और उनमें से भी ज्यादातर एक ही दिन में अपलोड हुईं। ये कई दिनों तक वहां पड़ी रहीं और 12 अक्टूबर को सब हटा ली गईं। यह साफ नहीं है कि इस डेटा के बारे में पहले किसी को पता था या नहीं।
इस कहानी का सबसे रहस्यमय पहलू अपलोड करने वाला अकाउंट है। उसका डिस्प्ले नाम CBFC के पूर्व चेयरमैन प्रसून जोशी का नाम था, जो रूसी भाषा (सिरिलिक लिपि) में लिखा गया था। फाइलें हटाने के बाद यह अकाउंट भी डिलीट कर दिया गया और द हिंदू उससे संपर्क नहीं कर सका। इंटरनेट आर्काइव ने अखबार को बताया कि अकाउंट को यूजर ने खुद हटाया था। अकाउंट के पीछे असल में कौन था और उसे ये दस्तावेज कैसे मिले, यह अब तक साफ नहीं है।

सेंसर बोर्ड का क्या कहना है
द हिंदू के मुताबिक जब अखबार ने पिछले हफ्ते CBFC से संपर्क किया, तो बोर्ड के पास इस लीक की तुरंत कोई जानकारी नहीं दिख रही थी। यह बताए जाने के करीब एक हफ्ते बाद कि किस फिल्म के आवेदन से कौन-से दस्तावेज लीक हुए, CBFC अध्यक्ष शशि शेखर वेम्पति के दफ्तर से बयान आया।
बयान में कहा गया, “CBFC ने ई-सिनेप्रमाण पोर्टल तक कथित अनधिकृत पहुंच से जुड़ी साझा की गई जानकारी की समीक्षा की है। हालांकि अब तक जांची गई जानकारी के आधार पर उन सर्टिफिकेशन दस्तावेजों का कोई निशान नहीं मिला है, जिन तक पहुंच का दावा किया गया है।” बोर्ड ने कहा कि एहतियात के तौर पर साइबर क्राइम में शिकायत दर्ज कराई गई है और देश की साइबर सुरक्षा एजेंसी CERT-In को भी सूचना दी गई है।
बोर्ड के मुताबिक उसकी तकनीकी टीम ने सर्वर और डेटाबेस की गहन जांच की है कि कहीं कोई बाहरी हमला तो नहीं हुआ, और इसके नतीजों को चल रही फॉरेंसिक जांच के साथ देखा जा रहा है। CBFC ने यह भी कहा कि किसी भी फिल्मकार का अकाउंट हैक होता नहीं दिखा है और वह ई-सिनेप्रमाण पोर्टल का “पूरा सुरक्षा ऑडिट” कराएगा। वेम्पति ने इंडिया टुडे से कहा कि जांच जारी है और इसके पूरा होने तक वे आगे कुछ नहीं कहेंगे।
यह भी पढ़ें: Udta Teer Box Office: सोमवार को लुढ़की या टिकी? 4 दिन में ₹22.70 करोड़ नेट
4 अक्टूबर को घंटों बंद रहा था पोर्टल
CBFC के बयान से एक और अहम कड़ी सामने आई। 4 अक्टूबर को ई-सिनेप्रमाण पोर्टल कई घंटों तक बंद रहा था, और द हिंदू के मुताबिक इसके कुछ ही समय बाद उस यूजर ने नई फाइलें अपलोड करना बंद कर दिया। हालांकि बोर्ड का कहना है कि इस दौरान सर्टिफिकेशन का कामकाज बिना रुकावट चलता रहा और पोर्टल बंद होने को लेकर किसी यूजर की शिकायत नहीं आई।
फिलहाल दो दावे आमने-सामने हैं। एक तरफ अखबार का कहना है कि उसने फिल्म-दर-फिल्म दस्तावेजों का ब्योरा बोर्ड को सौंपा, दूसरी तरफ बोर्ड कहता है कि अब तक की जांच में इन तक पहुंच का निशान नहीं मिला। फॉरेंसिक जांच और सुरक्षा ऑडिट से ही साफ होगा कि सेंध कहां लगी। लेकिन जिस संस्था के पास हर साल रिलीज होने वाली सैकड़ों फिल्मों की स्क्रिप्ट और कारोबारी सौदे जमा होते हैं, उसके डिजिटल सिस्टम की सुरक्षा पर यह मामला गंभीर सवाल जरूर खड़ा करता है।
यह भी पढ़ें: Internet Fundamental Right: सुप्रीम कोर्ट ने कहा- इंटरनेट हर व्यक्ति का मौलिक अधिकार, बच्चों पर पूरी रोक लगाना बेतुका






