India Drone Boat: न नाविक, न ड्राइवर, फिर भी गन से वार; नौसेना को मिली USV

India Drone Boat: समंदर में अब ऐसी नावें भारत की निगरानी करेंगी, जिन पर कोई नाविक सवार नहीं होगा, लेकिन जरूरत पड़ने पर ये दुश्मन पर गोली भी चला सकेंगी। पुणे की रक्षा स्टार्टअप सागर डिफेंस इंजीनियरिंग ने भारतीय नौसेना को हथियारबंद अनमैन्ड सरफेस वेसल (USV) यानी ड्रोन बोट की सप्लाई शुरू कर दी है। टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक नौसेना के iDEX ‘SPRINT’ कॉन्ट्रैक्ट के तहत कंपनी 12 हथियारबंद USV दे रही है, जिनमें उसकी चर्चित ‘मातंगी’ नाव भी शामिल है।

नई दिल्ली के मानेकशॉ सेंटर में 26-27 अक्टूबर को हो रहे नौसेना के इनोवेशन और स्वदेशीकरण सेमिनार ‘स्वावलंबन 2026’ में कंपनी ने अपना स्वदेशी ऑटोनॉमस अनमैन्ड मरीन सरफेस व्हीकल पेश किया। आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक नौसेना के बेड़े में शामिल किए जाने के बाद इस USV को पहली बार इसी प्रदर्शनी में दिखाया गया।
किन देशों के क्लब में पहुंचा भारत
आजतक ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि भारत अब उन चुनिंदा देशों की सूची में शामिल हो गया है जो USV बना सकते हैं, और अमेरिका, चीन, इजरायल और ब्रिटेन जैसे देशों के साथ भारत भी इस तकनीक में शामिल हो गया है। इससे पहले जनवरी 2026 में टाइम्स ऑफ इंडिया ने लिखा था कि इन हथियारबंद नावों के आने से भारत उन देशों की कतार में आ जाएगा जिनके पास हथियारबंद नावों के झुंड (स्वार्म) की तकनीक है। डिफेंस वेबसाइट द डिफेंस न्यूज ने भी इसे उन गिनी-चुनी नौसेनाओं में भारत की एंट्री बताया, जो हथियारबंद USV स्वार्म तैनात कर सकती हैं।
यह इसलिए भी अहम है क्योंकि टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक अब तक नौसेना इजरायल में बनी USV पर निर्भर थी, और वह भी सिर्फ समुद्री बारूदी सुरंगें हटाने (माइन काउंटर-मेजर) के काम के लिए। यानी पहली बार नौसेना के पास देश में डिजाइन और तैयार की गई ऐसी बिना नाविक वाली नाव है जो लड़ाकू भूमिका निभा सकती है।
बिना नाविक कैसे लड़ेगी यह नाव
टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक ये तेज रफ्तार इंटरसेप्टर नावें 12.7mm की स्टेबलाइज्ड रिमोट कंट्रोल्ड गन, इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल और रडार ट्रैकिंग और एंटी-जैमिंग GPS नेविगेशन से लैस हैं। इन्हें निगरानी और उथले पानी में आक्रामक अभियानों के लिए बिना नाविक चलाया जा सकता है, या फिर नौसेना के मरीन कमांडो (मार्कोस) को स्पेशल ऑपरेशन के लिए ले जाने में भी इस्तेमाल किया जा सकता है। अखबार के मुताबिक जरूरत पड़ने पर इनमें 14 से ज्यादा लोग सवार हो सकते हैं।

सबसे बड़ी खूबी इनका झुंड में काम करना है। द डिफेंस न्यूज के मुताबिक एक नाव 11 और नावों के साथ तालमेल बना सकती है, यानी 12 नावों का पूरा झुंड एक ही कमांड स्टेशन से सेंसर डेटा साझा करते हुए काम कर सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक इनकी रफ्तार 50 नॉट से ज्यादा है, ये लगातार 48 घंटे तक समुद्र में रह सकती हैं, और GPS जाम होने पर भारत के अपने नेविगेशन सिस्टम NavIC की मदद से रास्ता तय कर सकती हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक भविष्य में इन पर छोटी दूरी की मिसाइलें और लॉइटरिंग म्यूनिशन भी लगाए जा सकते हैं।
रेंज को लेकर रिपोर्ट्स में अलग-अलग आंकड़े हैं। जनवरी 2026 में टाइम्स ऑफ इंडिया और द डिफेंस न्यूज ने इसकी ऑपरेशनल रेंज 400 नॉटिकल मील (करीब 800 किलोमीटर) से ज्यादा बताई थी, जबकि 26 अक्टूबर की द डिफेंस न्यूज की रिपोर्ट में यह करीब 350 किलोमीटर बताई गई है।
150 वर्ग फुट के कमरे से नौसेना तक
टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक नौसेना ने 5 जनवरी 2022 को सागर डिफेंस के साथ 12 हथियारबंद नावों के लिए करार किया था। जनवरी 2026 के आखिर में पहली दो नावें पुणे की फैक्टरी से पश्चिमी तट पर तैनाती के लिए रवाना की गईं। द डिफेंस न्यूज के मुताबिक 12 में से 10 नावें तटीय अभियानों के लिए हैं, जबकि दो लद्दाख की पैंगोंग झील के लिए सेना को दी जानी हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक कुछ नावें पैंगोंग त्सो में सेना गश्त के लिए तैनात कर चुकी है।

इस नाव की क्षमता की बड़ी परीक्षा 2024 में हुई थी। द हिंदू के मुताबिक 29 अक्टूबर 2024 को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने स्वावलंबन कार्यक्रम के दौरान ‘सागरमाला परिक्रमा’ को वर्चुअली हरी झंडी दिखाई थी, जिसमें सागर डिफेंस की स्वायत्त नाव ने मुंबई से तमिलनाडु के थूथुकुडी तक करीब 1,500 किलोमीटर का सफर बिना इंसानी दखल के पूरा किया। कंपनी के CEO कैप्टन निकुंज पराशर ने तब कहा था कि यह सफर दिखाता है कि भारत स्वायत्त समुद्री सिस्टम देश में ही बना सकता है।
आजतक से बातचीत में निकुंज पराशर ने कहा कि यह नाव खासतौर पर खतरनाक मिशनों के लिए बनाई गई है, जिनमें निगरानी, टोही, बल सुरक्षा और विषम युद्ध शामिल हैं, और इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि जवानों की जान जोखिम में नहीं डालनी पड़ती।
यह भी पढ़ें: Wings over Ganges: गंगा के ऊपर गरजे राफेल-सुखोई, मोदी बोले- शानदार!
ड्रोन बोट पर क्यों टिकी हैं दुनिया की नजरें
काला सागर में यूक्रेन की सस्ती ड्रोन नावों ने रूस के कहीं महंगे युद्धपोतों को नुकसान पहुंचाया है, और इसके बाद दुनिया भर की नौसेनाएं बिना नाविक वाले प्लेटफॉर्म की ओर तेजी से बढ़ी हैं। भारत में भी यह होड़ दिख रही है। टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक स्वावलंबन प्रदर्शनी में जेन टेक्नोलॉजीज ने अपनी ऑटोनॉमस सरफेस वेसल का प्रोटोटाइप दिखाया, जबकि स्टार्टअप C14 ने अपना ‘तांडव’ मॉड्यूलर USV प्लेटफॉर्म पेश किया।
सेमिनार में नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन ने उद्योग और स्टार्टअप्स से स्वदेशी इनोवेशन को तेजी से ऑपरेशनल क्षमता में बदलने की अपील की। डिफेंस वॉच के मुताबिक उन्होंने बताया कि नौसेना से जुड़े iDEX चैलेंज 20 से बढ़कर 229 हो गए हैं, जो पूरे रक्षा क्षेत्र के करीब 35% iDEX चैलेंज हैं, और 1,900 करोड़ रुपये से ज्यादा के 25 कॉन्ट्रैक्ट साइन हो चुके हैं। सागर डिफेंस की ड्रोन बोट इसी iDEX रास्ते से नौसेना तक पहुंची है।
यह भी पढ़ें: Agniveer First Batch: 18,300 की विदाई, हाथ में ₹11.71 लाख; आगे क्या?






