अक्टूबर 27, 2026
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Army Fact Check: अरुणाचल पर ‘चीन कब्जे’ वाला जनरल का वीडियो डीपफेक निकला

अरुणाचल प्रदेश के तवांग जिले में भारत-चीन सीमा पर स्थित बुम ला दर्रा, पीछे पहाड़ और बादल

भारतीय सेना ने सोशल मीडिया पर फैल रहे एक वीडियो को डिजिटल रूप से छेड़छाड़ किया गया डीपफेक करार दिया है। इस वीडियो में स्पीयर कोर (3 कोर) के जनरल ऑफिसर कमांडिंग (GOC) लेफ्टिनेंट जनरल गिरीश कालिया के मुंह से ऐसी बातें कहलवाई गई थीं, जो उन्होंने कभी कही ही नहीं। सेना के आधिकारिक फैक्ट चेक हैंडल ‘Indian Army Fact Check’ (@MythbusterXX) ने X पर साफ किया कि वीडियो में AI से लिप-सिंक और आवाज की क्लोनिंग की गई है और असली फुटेज का अरुणाचल प्रदेश या चीन से कोई लेना-देना नहीं है।

अरुणाचल प्रदेश के तवांग जिले में भारत-चीन सीमा पर स्थित बुम ला दर्रा, पीछे पहाड़ और बादल
अरुणाचल प्रदेश के तवांग जिले में भारत-चीन सीमा पर बुम ला दर्रा (फाइल फोटो, 2014, प्रतीकात्मक)। फोटो: Itrajib / Wikimedia Commons (CC BY-SA 4.0)

सेना ने यह भी कहा कि इस तरह का कंटेंट सैन्य दुष्प्रचार फैलाने और लोगों में बेवजह घबराहट पैदा करने की कोशिश है। दूरदर्शन न्यूज (DD News), हिंदुस्तान टाइम्स और इंडिया टीवी ने भी सेना के इस खंडन को प्रमुखता से प्रकाशित किया है।

वीडियो में क्या झूठ फैलाया गया

सेना के फैक्ट चेक हैंडल के मुताबिक, वीडियो में लेफ्टिनेंट जनरल कालिया के नाम पर यह झूठा दावा जोड़ा गया कि अरुणाचल प्रदेश के असाफिला, लोंगजू और ताकसिंग सर्कल पर चीन का नियंत्रण हो गया है और वहां तैनात भारतीय सैनिकों को जरूरी सप्लाई नहीं मिल रही। हैंडल ने लिखा, “एक डिजिटल रूप से बदला गया वीडियो प्रसारित किया जा रहा है, जिसमें लेफ्टिनेंट जनरल गिरीश कालिया के नाम से गढ़ी गई टिप्पणियां जोड़ी गई हैं।” उसके मुताबिक यह भ्रामक वीडियो इन मनगढ़ंत बयानों को एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी के ‘लीक हुए कबूलनामे’ की तरह पेश करने की कोशिश करता है।

सेना ने दो टूक कहा कि अधिकारी ने अरुणाचल प्रदेश पर चीनी नियंत्रण या सेना को सप्लाई रोके जाने के बारे में ऐसा कोई बयान नहीं दिया। हैंडल ने अपनी पोस्ट में इसे #SyntheticGeneratedInformation यानी AI से तैयार की गई सामग्री बताया। फैक्ट चेक वेबसाइट Factly के मुताबिक फर्जी वीडियो पर समाचार एजेंसी ANI का लोगो भी लगा था, ताकि वह असली खबर जैसा लगे। Factly ने लिखा कि ANI ने भी इसे डीपफेक बताया है।

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असली क्लिप 2023 की कुपवाड़ा ब्रीफिंग की

सेना के मुताबिक जिस फुटेज से छेड़छाड़ की गई, वह 27 अक्टूबर 2023 को जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा में हुई एक प्रेस ब्रीफिंग का है। उस समय गिरीश कालिया मेजर जनरल थे और 28 इन्फैंट्री डिवीजन के GOC के तौर पर नियंत्रण रेखा (LoC) के हालात पर मीडिया से बात कर रहे थे।

सेना ने बताया कि उस ब्रीफिंग में उन्होंने LoC पार से घुसपैठ की कोशिशों का ब्योरा दिया था। इसमें घुसपैठ की 10 कोशिशें नाकाम करने, 27 आतंकियों के मारे जाने और हथियार-गोला बारूद के साथ नशीले पदार्थों की बरामदगी की जानकारी थी। हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक उस ब्रीफिंग में उन्होंने कहा था कि पिछले आठ महीनों में उनके डिवीजन के इलाके में घुसपैठ की 10 कोशिशें हुईं। यानी असली वीडियो में न चीन का जिक्र था, न अरुणाचल का।

भारत-चीन सीमा के पास अरुणाचल प्रदेश के बुम ला इलाके में बर्फ से ढके पहाड़
अरुणाचल प्रदेश में भारत-चीन सीमा के पास बुम ला इलाका (फाइल फोटो, 2016, प्रतीकात्मक)। फोटो: Vishnu1991nair / Wikimedia Commons (CC BY-SA 4.0)

सेना ने बताया फर्जीवाड़े का फॉर्मूला

सेना के फैक्ट चेक हैंडल ने इस वीडियो को बनाने का तरीका भी समझाया। उसके मुताबिक इसमें पुरानी सैन्य ब्रीफिंग, डिजिटल रूप से बदली गई टिप्पणियां, गलत तरीके से किसी अधिकारी के नाम जोड़ी गई बातें और गढ़े गए इलाकाई दावे मिलाकर भ्रामक सैन्य दुष्प्रचार तैयार किया गया। असली और आर्काइव फुटेज के ऊपर AI से बनाई गई आवाज और होंठों की हरकत चढ़ाई गई, ताकि देखने वाले को लगे कि अधिकारी खुद यह बात कह रहे हैं।

स्वतंत्र फैक्ट चेकर्स की जांच भी इसी नतीजे पर पहुंची। BOOM के मुताबिक वायरल वीडियो के ऑडियो को Hiya के डीपफेक वॉयस डिटेक्टर से जांचने पर उसे 100 में से सिर्फ 18 का ऑथेंटिसिटी स्कोर मिला, यानी आवाज के डीपफेक होने की संभावना ज्यादा है। Factly ने भी AI डिटेक्शन टूल्स के आधार पर ऑडियो को AI से बना बताया।

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सीमा से जुड़े वीडियो पर भरोसे से पहले क्या करें

सेना ने लोगों से अपील की है कि ऐसे किसी वीडियो को शेयर या आगे बढ़ाने से पहले उसके असली स्रोत की जांच जरूर करें। DD News के मुताबिक सेना ने यह भी कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा और सैन्य अभियानों से जुड़ी गलत जानकारी को रोकने के लिए AI से बने या डिजिटल रूप से बदले गए कंटेंट को पहचानना जरूरी है।

किसी सैन्य अधिकारी के कथित बयान वाला वीडियो दिखे, तो सबसे पहले सेना के आधिकारिक हैंडल, जैसे @adgpi और @MythbusterXX, पर देखें कि ऐसा कोई बयान जारी हुआ है या नहीं। सरकार से जुड़ी किसी संदिग्ध खबर की शिकायत PIB फैक्ट चेक यूनिट से भी की जा सकती है। PIB के मुताबिक इसके लिए व्हाट्सऐप हॉटलाइन +91 8799711259, ईमेल factcheck@pib.gov.in और वेबसाइट factcheck.pib.gov.in उपलब्ध हैं।

यह मामला ऐसे वक्त आया है, जब अरुणाचल प्रदेश में LAC से जुड़े मुद्दे पहले से चर्चा में हैं। ऐसे में किसी वरिष्ठ अधिकारी के नाम से गढ़ा गया एक वीडियो भी भ्रम फैला सकता है। सेना का साफ संदेश है कि सीमा से जुड़ी जानकारी के लिए सिर्फ आधिकारिक बयानों पर भरोसा करें।

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