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Govardhan Puja 2026 Kab Hai: 9 या 10 नवंबर? जानें अपने शहर का मुहूर्त

गोवर्धन पूजा 2026 पर घर में पूजा करती महिलाएं

दिवाली की जगमगाहट के ठीक बाद आता है अन्नकूट का पर्व, लेकिन इस बार तारीख को लेकर घर-घर में एक ही सवाल है: गोवर्धन पूजा 2026 कब है, 9 नवंबर या 10 नवंबर? द्रिक पंचांग के अनुसार दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार और ज्यादातर उत्तर भारत में गोवर्धन पूजा मंगलवार, 10 नवंबर 2026 को होगी। नई दिल्ली में सुबह 6:40 से 8:50 बजे तक पूजा का शुभ मुहूर्त है। वहीं जयपुर, मुंबई, अहमदाबाद और इंदौर जैसे पश्चिमी शहरों में पंचांग 9 नवंबर की शाम का मुहूर्त बता रहे हैं।

गोवर्धन पूजा 2026 पर घर में पूजा करती महिलाएं
घर में गोवर्धन पूजा करती महिलाएं (फाइल फोटो: Deepak Jindal / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0)

Govardhan Puja 2026 Date: तिथि और शुभ मुहूर्त

  • गोवर्धन पूजा (दिल्ली व उत्तर भारत): मंगलवार, 10 नवंबर 2026
  • प्रातःकाल मुहूर्त (नई दिल्ली): सुबह 6:40 से 8:50 बजे तक
  • अवधि: 2 घंटे 10 मिनट
  • प्रतिपदा तिथि शुरू: 9 नवंबर, दोपहर 12:31 बजे
  • प्रतिपदा तिथि खत्म: 10 नवंबर, दोपहर 2:00 बजे

9 या 10 नवंबर? ऐसे समझिए उलझन

इस साल दिवाली 8 नवंबर को है, लेकिन अमावस्या 9 नवंबर की दोपहर 12:31 बजे तक चलेगी। इसके बाद कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा शुरू होगी, जो 10 नवंबर दोपहर 2:00 बजे तक रहेगी। गोवर्धन पूजा प्रतिपदा तिथि में होती है, इसलिए इस बार दिवाली और गोवर्धन पूजा के बीच एक दिन का अंतर पड़ रहा है। ऐसा हर साल नहीं होता, आमतौर पर गोवर्धन पूजा दिवाली के अगले ही दिन होती है।

उत्तर और पूर्व भारत में 10 नवंबर की सुबह सूर्योदय के समय प्रतिपदा मौजूद है, इसलिए वहां पूजा 10 नवंबर की सुबह होगी। पश्चिमी भारत में सूर्योदय देर से होता है, इसलिए पंचांग गणना के हिसाब से वहां 9 नवंबर की शाम का मुहूर्त निकल रहा है। केंद्र सरकार के कार्मिक विभाग (DoPT) की 2026 की छुट्टियों की सूची में गोवर्धन पूजा को 9 नवंबर की प्रतिबंधित (वैकल्पिक) छुट्टी के तौर पर रखा गया है। यानी पूजा अपने शहर के पंचांग के हिसाब से करें।

आपके शहर में गोवर्धन पूजा का मुहूर्त

10 नवंबर (मंगलवार), सुबह का मुहूर्त:

  • नई दिल्ली: सुबह 6:40 – 8:50 बजे
  • फरीदाबाद: सुबह 6:39 – 8:49 बजे
  • मेरठ: सुबह 6:38 – 8:48 बजे
  • आगरा: सुबह 6:34 – 8:45 बजे
  • चंडीगढ़: सुबह 6:45 – 8:53 बजे
  • लखनऊ: सुबह 6:22 – 8:33 बजे
  • पटना: सुबह 6:03 – 8:15 बजे
  • कोलकाता: सुबह 5:46 – 8:00 बजे
  • भोपाल: सुबह 6:31 – 8:44 बजे
  • बेंगलुरु: सुबह 6:16 – 8:35 बजे
  • हैदराबाद: सुबह 6:18 – 8:35 बजे

9 नवंबर (सोमवार), शाम का मुहूर्त:

  • जयपुर: दोपहर 3:28 – शाम 5:39 बजे
  • इंदौर: दोपहर 3:31 – शाम 5:45 बजे
  • अहमदाबाद: दोपहर 3:44 – शाम 5:58 बजे
  • मुंबई: दोपहर 3:46 – शाम 6:02 बजे

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गोबर से बना गोवर्धन पर्वत, फूलों से सजा
गोबर से बनाए गए गोवर्धन पर्वत को फूलों से सजाया जाता है (फाइल फोटो: Bijay chaurasia / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0)

गोवर्धन पूजा की विधि

  • सुबह स्नान के बाद घर के आंगन या मुख्य द्वार के पास गाय के गोबर से गोवर्धन पर्वत की आकृति बनाएं। कई घरों में इसे लेटे हुए पुरुष के रूप में बनाया जाता है।
  • आकृति को फूल, दूब, रुई और सींकों से सजाएं। बीच में दीपक रखें।
  • रोली, चावल, खीर, बताशे, दूध, पान और मिठाई चढ़ाकर गोवर्धन महाराज और भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करें।
  • परिवार के साथ गोवर्धन की आकृति की सात बार परिक्रमा करें और जल अर्पित करते चलें।
  • गाय और बैलों को स्नान कराकर सजाएं, उन्हें गुड़ और चारा खिलाएं।
  • अंत में अन्नकूट का भोग लगाकर आरती करें और प्रसाद बांटें।
अन्नकूट के भोग की तैयारी
अन्नकूट के भोग की तैयारी करते श्रद्धालु (फाइल फोटो: Goutam1962 / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0)

अन्नकूट: 56 भोग की परंपरा

गोवर्धन पूजा को अन्नकूट भी कहते हैं, यानी अन्न का पहाड़। इस दिन मंदिरों और घरों में नई फसल के अनाज और सब्जियों से कई तरह के पकवान बनाकर भगवान को भोग लगाया जाता है। मथुरा-वृंदावन और गोवर्धन के मंदिरों में 56 भोग की झांकी सजती है। कढ़ी-चावल, बाजरा, मिली-जुली सब्जी और पूड़ी इस दिन के खास पकवान माने जाते हैं।

श्रीकृष्ण की गोवर्धन लीला की झांकी
वृंदावन के प्रेम मंदिर परिसर में गोवर्धन लीला की झांकी (फोटो: Aliva Sahoo / Wikimedia Commons, CC BY-SA 3.0)

गोवर्धन पूजा की कथा: जब कान्हा ने उंगली पर उठाया पर्वत

भागवत पुराण की कथा के अनुसार ब्रज के लोग हर साल अच्छी बारिश के लिए देवराज इंद्र की पूजा करते थे। बालक कृष्ण ने उन्हें समझाया कि असली पालनहार गोवर्धन पर्वत और गौएं हैं, इसलिए पूजा उनकी होनी चाहिए। इससे नाराज इंद्र ने ब्रज पर मूसलाधार बारिश शुरू कर दी। तब श्रीकृष्ण ने अपनी कनिष्ठा उंगली पर पूरा गोवर्धन पर्वत उठा लिया और सात दिन तक सारे ब्रजवासी और पशु उसके नीचे सुरक्षित रहे। आखिर में इंद्र को अपनी भूल का एहसास हुआ। तभी से कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को गोवर्धन पूजा की परंपरा चली आ रही है।

गोवर्धन पूजा के अगले दिन भाई दूज है और उसके बाद छठ महापर्व की तैयारी शुरू हो जाएगी।

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यह लेख द्रिक पंचांग की शहरवार गणना, केंद्र सरकार की 2026 की छुट्टियों की सूची और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। मुहूर्त स्थान के हिसाब से बदल सकता है, स्थानीय पंडित से भी पुष्टि कर लें।

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