KGMU में धर्मांतरण का खेल? STF की 7 पन्नों की रिपोर्ट में 12 मामलों का खुलासा

KGMU धर्मांतरण केस: लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में कथित धर्मांतरण के दबाव और महिला डॉक्टरों व कर्मचारियों के उत्पीड़न से जुड़ी शिकायतों पर अब शासन ने सख्ती दिखाई है। उत्तर प्रदेश STF की जांच रिपोर्ट के आधार पर चिकित्सा शिक्षा अनुभाग-2 के संयुक्त सचिव आनंद कुमार त्रिपाठी ने 30 अक्टूबर 2026 को KGMU के कुलसचिव को पत्र भेजकर रिपोर्ट में चिह्नित शिक्षकों और कर्मचारियों के खिलाफ KGMU अधिनियम-2002 और परिनियमावली-2011 के तहत नियमानुसार कार्रवाई करने और उसकी आख्या शासन को भेजने को कहा है। दैनिक भास्कर और दैनिक जागरण ने इस पत्र के हवाले से यह जानकारी दी है।

यह खबर पूरी तरह जांच एजेंसी की रिपोर्ट, सरकारी पत्र, KGMU के पिछले आधिकारिक बयानों और मीडिया रिपोर्टों पर आधारित है। रिपोर्ट में जिन लोगों का जिक्र है, उन पर लगे आरोप अभी आरोप ही हैं। किसी भी आरोपी को अदालत ने अब तक दोषी नहीं ठहराया है और कानून की नजर में हर व्यक्ति तब तक निर्दोष है, जब तक दोष साबित न हो।
STF रिपोर्ट में क्या है?
आजतक और TV9 भारतवर्ष के मुताबिक STF ने करीब 10 महीने की जांच के बाद रिपोर्ट तैयार की। जांच की जिम्मेदारी एडिशनल एसपी प्रमेश शुक्ला को दी गई थी और STF प्रमुख व एडीजी कानून-व्यवस्था अमिताभ यश ने सात पेज की संस्तुति रिपोर्ट शासन को भेजी। भास्कर और अमर उजाला के अनुसार यह रिपोर्ट 25 अगस्त 2026 के पत्र के साथ शासन को सौंपी गई थी, जिस पर 30 अक्टूबर को KGMU को निर्देश भेजा गया।
मीडिया रिपोर्टों में बताए गए रिपोर्ट के मुख्य बिंदु:
- 12 कथित मामले: रिपोर्ट में पैथोलॉजी, माइक्रोबायोलॉजी, रेडियोलॉजी विभाग और गांधी वार्ड से जुड़े 12 कथित मामलों का जिक्र बताया गया है।
- आरोपों की प्रकृति: महिला रेजिडेंट डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और अन्य महिला कर्मचारियों ने शारीरिक-मानसिक उत्पीड़न, ब्लैकमेलिंग, निकाह और धर्म परिवर्तन के दबाव की शिकायतें की थीं।
- करियर पर दबाव के आरोप: कुछ शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया कि विरोध करने पर उन्हें परीक्षा में फेल करने या करियर खराब करने की धमकी दी गई। एक संविदा कर्मचारी को शिकायत के बाद नौकरी से हटाए जाने का भी उल्लेख है।
- शिकायतें दबाने के आरोप: रिपोर्ट में कुछ विभागाध्यक्षों और वरिष्ठ फैकल्टी पर शिकायतों पर कार्रवाई न करने और आरोपियों का पक्ष लेने के आरोप दर्ज हैं। आजतक के मुताबिक रिपोर्ट में छुट्टी देने में भेदभाव की शिकायतों का भी जिक्र है।
- अनौपचारिक ग्रुप का जिक्र: Zee News और अमर उजाला के अनुसार रिपोर्ट में आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज के कुछ पूर्व छात्रों के एक अनौपचारिक ग्रुप का भी उल्लेख है, जिससे कुछ आरोपी डॉक्टरों के जुड़े होने की बात कही गई है।
TV9 भारतवर्ष के मुताबिक रिपोर्ट में कुल 12 लोगों की भूमिका संदिग्ध बताई गई है, जिनमें 5 मुख्य आरोपी और 7 ऐसे लोग हैं जिन पर मदद या संरक्षण देने का आरोप है। जिन लोगों के नाम रिपोर्ट में बताए जा रहे हैं, उनका पक्ष अभी सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है, इसलिए News Centre India फिलहाल डॉ. रमीज को छोड़कर किसी का नाम प्रकाशित नहीं कर रहा है। Zee News ने भी लिखा है कि रिपोर्ट के सभी आरोप जांच के दायरे में हैं और संबंधित पक्षों का जवाब आना बाकी है।
कैसे शुरू हुआ मामला? पूरी टाइमलाइन
- 17 दिसंबर 2025: पैथोलॉजी विभाग की एक महिला रेजिडेंट डॉक्टर ने दवा की ओवरडोज ली। उन्हें गंभीर हालत में KGMU ट्रॉमा सेंटर में भर्ती किया गया और 19 दिसंबर को छुट्टी मिली (Hindustan Times)।
- 22 दिसंबर 2025: KGMU ने आरोपी रेजिडेंट डॉक्टर डॉ. रमीजुद्दीन नायक उर्फ रमीज मलिक को निलंबित किया और परिसर में उनके प्रवेश पर रोक लगाई। उसी दिन विशाखा कमेटी की जांच शुरू हुई।
- 23 दिसंबर 2025: लखनऊ के चौक थाने में FIR दर्ज हुई। HT के मुताबिक इसमें BNS की धारा 69, 89, 351(1) और यूपी विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम-2021 की धारा 3 और 5(1) लगाई गईं।
- जनवरी 2026: विशाखा कमेटी ने डॉ. रमीज को शादी की बात छिपाने, पीछा करने और धमकाने का दोषी पाया। कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद ने निष्कासन की सिफारिश की घोषणा की। कमेटी अध्यक्ष डॉ. मोनिका कोहली ने साफ किया कि धर्मांतरण के आरोप विशाखा कमेटी के दायरे में नहीं थे; इसके लिए KGMU ने अलग फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी बनाई।
- 9 जनवरी 2026: शासन के पत्र के मुताबिक डॉ. रमीज की गिरफ्तारी हुई। इससे पहले फरारी के दौरान उनकी मदद के आरोप में उनके माता-पिता को गिरफ्तार किया गया था (Times of India)।
- फरवरी 2026: चौक पुलिस ने डॉ. रमीज और उनके माता-पिता के खिलाफ करीब 800 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की (आजतक)।
- 25 अगस्त 2026: STF ने KGMU परिसर से जुड़ी शिकायतों की जांच रिपोर्ट शासन को भेजी।
- 30 अक्टूबर 2026: चिकित्सा शिक्षा विभाग ने रिपोर्ट की कॉपी KGMU को भेजकर कार्रवाई और आख्या मांगी। पत्र की कॉपी कुलपति को भी भेजी गई।
आरोपी पक्ष ने क्या कहा?
Hindustan Times के मुताबिक विशाखा कमेटी की अध्यक्ष डॉ. मोनिका कोहली ने बताया था कि डॉ. रमीज जांच के दौरान एक बार कमेटी के सामने पेश हुए और उन्होंने संबंध को आपसी सहमति का बताया तथा शादीशुदा होने से इनकार किया था। कमेटी ने सबूतों के आधार पर उनकी इस बात को सही नहीं माना। आपराधिक मामला अभी अदालत में है। STF रिपोर्ट में जिन अन्य डॉक्टरों और कर्मचारियों का जिक्र है, उनकी ओर से 31 अक्टूबर सुबह तक कोई सार्वजनिक बयान सामने नहीं आया है। उनका पक्ष आने पर यह खबर अपडेट की जाएगी।
KGMU प्रशासन का रुख
जनवरी में कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद ने कहा था, “किसी भी हालत में डॉ. रमीज मलिक KGMU का हिस्सा नहीं रह सकते।” उस समय KGMU प्रवक्ता डॉ. के.के. सिंह ने ANI से कहा था कि मामले के हर पहलू की जांच होगी, जिसमें उन लोगों की भूमिका भी शामिल है जिन्हें कथित घटनाओं की जानकारी थी या जिन्होंने उन्हें छिपाने में मदद की। शासन के ताजा पत्र पर KGMU प्रशासन का आधिकारिक बयान अभी आना बाकी है।
अब आगे क्या होगा?
शासन के निर्देश के बाद KGMU प्रशासन को अपने कानून और नियमावली के तहत चिह्नित कर्मचारियों पर विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू करनी होगी। इसमें आम तौर पर नोटिस देना, जवाब लेना और जांच के बाद फैसला शामिल होता है। इसके बाद पूरी आख्या शासन को भेजी जाएगी। वहीं, डॉ. रमीज से जुड़ा आपराधिक मुकदमा अदालत में अपनी प्रक्रिया से चलेगा। सबसे बड़ा सवाल यही है कि शिकायत करने वाली महिला डॉक्टरों और कर्मचारियों को कितनी जल्दी और कितना निष्पक्ष न्याय मिलता है, और संस्थान की आंतरिक शिकायत व्यवस्था कितनी मजबूत होती है।






