अक्टूबर 31, 2026
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₹480 करोड़ की नोएडा एलिवेटेड रोड 35 दिन में 2 बार धंसी, अब IIT खोलेगा राज

नोएडा एलिवेटेड रोड: करीब ₹480 करोड़ में बनी जिस सड़क से रोज करीब डेढ़ लाख लोग नोएडा, गाजियाबाद और दिल्ली के बीच आते-जाते हैं, उसमें 35 दिन के भीतर दूसरी बार सड़क धंस गई है। सेक्टर-33 (इस्कॉन मंदिर के पास) बने गड्ढे के बाद सेक्टर-61 से सेक्टर-18 की ओर जाने वाला पूरा कैरिजवे करीब 10 दिन से बंद है। नोएडा प्राधिकरण ने सड़क बनाने वाली कंपनी ITD Cementation India Limited को कारण बताओ नोटिस दिया है और IIT रुड़की से जांच कराई जा रही है।

नोएडा एलिवेटेड रोड पर धंसी सड़क के पास बैरिकेडिंग
नोएडा एलिवेटेड रोड पर सेक्टर-61 से सेक्टर-18 की ओर जाने वाले हिस्से में धंसी सड़क के पास बैरिकेडिंग और रेत की बोरियां (फोटो: Now Noida / X, 20 अक्टूबर 2026)

पहले भरा गड्ढा, फिर उसी जगह और बड़ा हो गया

प्राधिकरण के अधिकारियों के मुताबिक सेक्टर-33 के सामने इस मार्ग पर पहले 18 अक्टूबर के आसपास गड्ढा हुआ था, जिसे भरवा दिया गया, लेकिन उसी जगह फिर गड्ढा हो गया। करीब 2×2 फुट का यह हिस्सा एक राहगीर की सूचना पर सामने आया। शुरुआत में सिर्फ उस हिस्से को घेरकर ट्रैफिक चलने दिया गया, लेकिन तीन दिन बाद गड्ढा बढ़ने पर पूरा कैरिजवे बंद करना पड़ा। उस समय अधिकारियों ने मरम्मत दो दिन में पूरी होने की उम्मीद जताई थी।

स्थानीय रिपोर्ट्स के मुताबिक सेक्टर-33 के सामने सेक्टर-18 की ओर जाने वाली सड़क पर बिटुमिन की ऊपरी परत धंसने के साथ नीचे की कंक्रीट भी उखड़ गई और सरिया दिखने लगा। सितंबर में सेक्टर-28 वाले हिस्से की मरम्मत के दौरान भी करीब 10 फुट के दायरे में सड़क के नीचे लगभग 12 फुट गहराई तक खोखलापन मिलने और नीचे की मिट्टी बह जाने की बात सामने आई थी। फिलहाल गड्ढे को मिट्टी के बोरों और कंक्रीट से अस्थायी रूप से ढका गया है।

35 दिन पहले भी धंसी थी यही सड़क

यह पहली घटना नहीं है। 15 सितंबर 2026 को इसी एलिवेटेड रोड के लूप पर विश्व भारती पब्लिक स्कूल के पास (सेक्टर-28 की ओर उतरते समय) करीब 10×5 फुट का हिस्सा धंस गया था। तब अधिकारियों ने इसकी वजह नीचे से गुजरने वाली पुरानी पानी और सीवर लाइनों के लीकेज से मिट्टी खिसकना बताई थी। लेकिन अक्टूबर वाला गड्ढा सड़क के बीचों-बीच है, जो ढांचे की मजबूती पर सीधा सवाल खड़ा करता है।

सड़क का पुराना रिकॉर्ड

  • 2013: निर्माण शुरू। प्राधिकरण ने यह ‘एमपी-टू’ एलिवेटेड रोड ITD Cementation India Limited से बनवाई।
  • 29 जून 2017: सड़क का एक हिस्सा वाहनों के लिए खुला; 2018 में पूरी सड़क शुरू हुई। स्थानीय रिपोर्ट्स के मुताबिक जानकार उद्घाटन से पहले जल्दबाजी में हुए निर्माण और मटीरियल के ठीक से कंप्रेस न होने को भी एक संभावित वजह मान रहे हैं।
  • 2020: सेक्टर-61 से सेक्टर-18 की ओर जाते हुए सड़क पर दरारें आईं, सेक्टर-31 वाला रैंप बंद करना पड़ा और कई महीने मरम्मत चली।
  • 2022: गुणवत्ता पर फिर सवाल उठे और IIT रुड़की से जांच कराई गई।
  • मार्च 2024: सतह पर दरारें आने और परतें उखड़ने के बाद प्राधिकरण ने करीब ₹14.55 करोड़ खर्च कर मरम्मत और रीस्टोरेशन कराया।
  • 15 सितंबर 2026: सेक्टर-28 की ओर लूप पर सड़क धंसी।
  • 18-22 अक्टूबर 2026: सेक्टर-33 के पास गड्ढा, भरने के बाद फिर बढ़ा, सेक्टर-61 से 18 वाला कैरिजवे बंद।
  • 26 अक्टूबर 2026: प्राधिकरण ने निर्माण कंपनी को कारण बताओ नोटिस देने की जानकारी दी।

स्थानीय रिपोर्ट्स के मुताबिक लापरवाही के एक पुराने मामले में प्राधिकरण इस कंपनी पर ₹35 लाख का जुर्माना भी लगा चुका है। सड़क खुलने के बाद पांच साल तक रखरखाव कंपनी को करना था, लेकिन खर्च को लेकर कंपनी और प्राधिकरण के बीच विवाद हुआ और मामला कमर्शियल कोर्ट में है। यानी अभी यह भी साफ नहीं कि रखरखाव की जिम्मेदारी किसकी है। दिलचस्प यह है कि कंपनी की वेबसाइट पर इसी नोएडा एलिवेटेड प्रोजेक्ट के लिए इंडियन कंक्रीट इंस्टीट्यूट का ‘Outstanding Concrete Structure Award’ मिलने का जिक्र है।

नोएडा एलिवेटेड रोड सेक्टर-33 पर जांच करती इंजीनियरिंग टीम
सेक्टर-33 के पास एलिवेटेड रोड का निरीक्षण करती इंजीनियरिंग टीम (फोटो: NBT Dilli / X, 24 अक्टूबर 2026)

प्राधिकरण ने क्या कहा?

नोएडा प्राधिकरण के महाप्रबंधक एस.पी. सिंह ने कहा, “हमने निर्माण कंपनी ITD Cementation India Limited को कारण बताओ नोटिस जारी कर पूछा है कि जनता के लिए खुलने के आठ साल के भीतर एलिवेटेड रोड में दरारें क्यों आईं और यह क्यों धंसी।” उन्होंने कहा कि IIT की रिपोर्ट और कंपनी के जवाब के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी। प्राधिकरण की अतिरिक्त CEO वंदना त्रिपाठी ने कहा था कि यह भी जांचा जा रहा है कि यह घटना पिछली घटना से जुड़ी है या नहीं।

अधिकारियों के मुताबिक IIT रुड़की के वरिष्ठ प्रोफेसरों की टीम ने मौके पर निरीक्षण किया और पांच तरह के सैंपल लिए। टीम आसपास के 30-40 मीटर हिस्से की मजबूती भी जांच रही है। जांच में देखा जाएगा कि कंक्रीट, सरिया और बाकी मटीरियल तय मानकों के हिसाब से थे या नहीं, डिजाइन का पालन हुआ या नहीं, और कहीं वजह जंग, पानी का रिसाव, ज्यादा ट्रैफिक लोड या कमजोर रीइन्फोर्समेंट तो नहीं।

कंपनी का पक्ष

31 अक्टूबर दोपहर तक कंपनी (अब Cemindia Projects Limited) की ओर से नोटिस पर कोई सार्वजनिक बयान या जवाब सामने नहीं आया है। कंपनी का पक्ष आने पर यह खबर अपडेट की जाएगी।

रिपोर्ट 2-3 दिन में आनी थी, अब तक इंतजार

23-24 अक्टूबर को अधिकारियों ने कहा था कि IIT की रिपोर्ट दो-तीन दिन में आ जाएगी। लेकिन 28 अक्टूबर तक प्राधिकरण को रिपोर्ट नहीं मिली थी और 31 अक्टूबर दोपहर तक भी इसके सार्वजनिक होने की कोई जानकारी नहीं है। महाप्रबंधक एस.पी. सिंह के अनुसार रिपोर्ट के आधार पर ही मरम्मत होगी और उसके बाद ही सड़क खोली जाएगी। अनुमान है कि रिपोर्ट मिलने के बाद पूरी मरम्मत में करीब 10 दिन और लग सकते हैं।

तब तक ट्रैफिक महाराजा अग्रसेन मार्ग पर डायवर्ट है। वाहन चालक सेक्टर-31 के रैंप से एलिवेटेड रोड पर चढ़कर सेक्टर-18 की ओर जा सकते हैं, लेकिन सेक्टर-61 की तरफ से आने वाले लोग सुबह-शाम कैलाश अस्पताल और डीएस तिराहे के आसपास जाम में फंस रहे हैं। सवाल यही है कि करोड़ों की मरम्मत के बाद भी बार-बार धंस रही इस सड़क की जवाबदेही आखिर किसकी तय होगी।

यह खबर नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों के बयानों और स्थानीय रिपोर्ट्स पर आधारित है। घटिया निर्माण से जुड़ी बातें अभी आशंकाएं हैं; असली वजह IIT रुड़की की तकनीकी रिपोर्ट से ही साफ होगी।

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