Bhutan Flash Flood: भूटान में फटी ग्लेशियर झील, असम-बंगाल तक अलर्ट

Bhutan Flash Flood: भूटान के उत्तर में बसे गासा जिले में गुरुवार शाम एक ग्लेशियर झील फट गई और कुछ ही घंटों में इसका असर भारत के असम और पश्चिम बंगाल तक महसूस होने लगा। शिंताफू झील से निकला पानी मो छू नदी के रास्ते नीचे की ओर दौड़ा। भूटान में गासा त्शाचू हॉट स्प्रिंग की सुविधाएं बह गईं और लाया जाने वाली सड़क कट गई। राहत की बात यह है कि अब तक किसी की मौत या चोट की खबर नहीं है, क्योंकि खतरे वाले इलाके पहले ही खाली करा लिए गए थे। भारत में संकोश नदी पर रेड अलर्ट है और अलीपुरद्वार में हजारों लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया गया है।

कहां फटी झील, कितना पानी निकला?
शिंताफू झील (शिंताफू त्शो) गासा जिले के लाया गेवोग में वाकिला पर्वत के नीचे है और मो छू नदी के ऊपरी हिस्से में आती है। भूटान की इसे 17 संभावित खतरनाक ग्लेशियर झीलों में गिना जाता है। NDTV Profit के मुताबिक भारत को भेजे गए अलर्ट में बताया गया कि झील से करीब 74 लाख घन मीटर (7.4 मिलियन क्यूबिक मीटर) पानी निकला। इतना पानी करीब तीन हजार ओलंपिक स्विमिंग पूल भरने के बराबर है।
भूटान के सरकारी प्रसारक BBS के मुताबिक बाढ़ का पानी रात करीब 8:15 बजे ताकत्सीमाखांग से गुजरा। इसके बाद यह काबेसा गेवोग के श्रीगांग तक पहुंचा, जो ऐतिहासिक पुनाखा जोंग से करीब 8 किलोमीटर दूर है। अंधेरे और तेज बहाव की वजह से रात में नुकसान का पूरा आकलन नहीं हो सका।
भूटान में क्या-क्या बहा?
- गासा त्शाचू: मो छू किनारे का मशहूर प्राकृतिक हॉट स्प्रिंग पूरी तरह बह गया। अगस्त 2021 में भी यहां ऐसी ही बाढ़ आई थी।
- लाया सड़क: सड़क का एक हिस्सा बह गया, लाया इलाका देश के बाकी हिस्से से कट गया है। Kuensel के मुताबिक सड़क अनिश्चितकाल के लिए बंद है।
- बेली ब्रिज: BBS के मुताबिक दो बेली ब्रिज बह जाने की आशंका है।
- सोलर सिंचाई प्रोजेक्ट: पुनाखा के गुमा गेवोग में इसी साल लगा सोलर इरिगेशन लिफ्टिंग सिस्टम आंशिक रूप से टूटकर बंद हो गया। (India Today)
- हाईवे: जोमलिंगथांग के पास पुनाखा-गासा हाईवे पर मलबा आ गया।
पुनात्सांगछू डैम के गेट खोले गए
मो छू आगे चलकर पुनात्सांगछू बनती है, जिस पर भारत की मदद से बने बड़े हाइड्रो प्रोजेक्ट हैं। BBS के हवाले से Eastern Lens ने बताया कि पुनात्सांगछू-II हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में एहतियातन बिजली बनाने वाली यूनिटें बंद कर दी गईं और डैम के गेट खोल दिए गए, ताकि पानी और बहकर आने वाले पेड़-लकड़ी बिना नुकसान किए निकल जाएं। प्रोजेक्ट के जॉइंट MD रिनजिन ग्येल्त्सेन ने कहा कि मलबा इनटेक टनल को जाम कर सकता था। अलर्ट के मुताबिक PHPA-II का जलाशय पूरी तरह खाली कर सभी स्लूइस गेट खोले गए।
भूटान का सबसे बड़ा भारतीय सहयोग वाला ताला हाइड्रो प्रोजेक्ट वांगछू नदी पर है, जो इस बेसिन से अलग है। अब तक ताला पर किसी असर की कोई रिपोर्ट नहीं है।
भारत पर असर: संकोश के रास्ते असम-बंगाल
पुनात्सांगछू भारत में आकर संकोश कहलाती है। यह पश्चिम बंगाल के अलीपुरद्वार और कूचबिहार से होते हुए असम के धुबरी के पास ब्रह्मपुत्र में मिलती है। इसलिए भूटान में आई हर बड़ी बाढ़ का सीधा असर इन इलाकों पर पड़ सकता है।
- भारत सरकार की एडवाइजरी: संकोश के जलस्तर में अचानक तेज बढ़ोतरी की चेतावनी। अलीपुरद्वार (बंगाल) और धुबरी (असम) को सतर्क रहने को कहा गया। पानी 6 से 8 घंटे में भारत-भूटान सीमा तक पहुंचने का अनुमान था।
- CWC की निगरानी: केंद्रीय जल आयोग ने बारोबिशा, संकोश LRP, गोलकगंज और बालाडोबा स्टेशनों को लगातार नजर रखने और हर बदलाव तुरंत बताने को कहा।
- NDRF-SDRF तैनात: कूचबिहार के तुफानगंज और बक्सीरहाट में टीमें लगाई गईं, जो असम सीमा के पास संकोश किनारे हैं।
- बाकी उत्तर बंगाल: दार्जिलिंग पहाड़, जलपाईगुड़ी (बानरहाट समेत) और कूचबिहार में भी अलर्ट।
अलीपुरद्वार के SP अमित कुमार शॉ ने ANI से कहा, “घबराने की कोई जरूरत नहीं है, स्थिति नियंत्रण में है। हम भूटान के अधिकारियों से लगातार संपर्क में हैं।” उनके मुताबिक 4,000 से 5,000 लोगों को स्कूलों में बने राहत शिविरों में भेजा गया है और 6,000 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित जगहों पर शिफ्ट किया गया है। उन्होंने बताया कि बहाव की तीव्रता थोड़ी कम हुई है, लेकिन संकोश पर रेड अलर्ट जारी है और नदी में मरी मछलियां, बड़ी लकड़ियां और कंक्रीट का मलबा आ सकता है।
बंगाल के वन मंत्री और कुमारग्राम के विधायक मनोज कुमार ओरांव ने फेसबुक वीडियो में कुमारग्राम, पाकरीगुड़ी, भोलका और आसपास के चाय बागानों के लोगों से ऊंची जगहों पर जाने की अपील की। उन्होंने यह भी चेताया कि पानी जंगलों में घुसा तो हाथी और दूसरे जंगली जानवर बस्तियों की ओर आ सकते हैं।
बारिश नहीं, झील फटने से आई बाढ़
यह बाढ़ बारिश से नहीं, ग्लेशियर झील के अचानक फटने (GLOF) से आई है, इसलिए खतरा मुख्य रूप से संकोश के किनारों तक सीमित है। भूटान का राष्ट्रीय जल-मौसम केंद्र (NCHM) मो छू पर ताशीथांग और येबेसा स्टेशनों से जलस्तर देख रहा है और मो छू व पुनात्सांगछू के नीचे सायरन चालू किए गए हैं। भारत में प्रशासन और CWC का पूरा फोकस संकोश के जलस्तर पर है।
GLOF क्या है और खतरा क्यों बढ़ रहा है?
ग्लेशियर पिघलने से बनी झील का प्राकृतिक बांध (मोरेन) अचानक टूट जाए तो जमा पानी एक झटके में घाटी में उतरता है। इसे ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड यानी GLOF कहते हैं। यह पानी तेजी से पत्थर, पेड़ और मलबा बहाकर ले जाता है। 2023 में सिक्किम की दक्षिण ल्होनक झील फटने से तीस्ता में आई तबाही ने दिखाया था कि हिमालय की ये झीलें नीचे बसे भारत के लिए कितना बड़ा जोखिम हैं।
आप संकोश के पास रहते हैं तो क्या करें?
- प्रशासन के कहने पर बिना देर किए ऊंची जगह या राहत शिविर में जाएं, पानी चढ़ने का इंतजार न करें।
- नदी किनारे, पुलों और घाटों पर जाने और वीडियो बनाने से बचें।
- जरूरी कागजात, दवाइयां, पानी और सूखा खाना एक बैग में तैयार रखें।
- सिर्फ जिला प्रशासन, पुलिस और CWC की आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करें, अफवाह आगे न बढ़ाएं।
अब आगे क्या?
भूटान में दिन की रोशनी में नुकसान का सर्वे होगा और लाया सड़क व पुलों की मरम्मत शुरू होगी। भारत में अगले कुछ घंटे अहम हैं, जब बाढ़ का पानी संकोश से होकर निचले इलाकों में पहुंचेगा। प्रशासन ने कहा है कि हालात सामान्य होने तक अलर्ट जारी रहेगा।
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