ISRO NVS-03 Launch: आज रात 11:51 पर उड़ेगा GSLV, देसी GPS को मिलेगी नई जान

ISRO NVS-03 Launch: भारत का अपना नेविगेशन सिस्टम NavIC आज रात एक बड़ी छलांग की तैयारी में है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) शुक्रवार, 30 अक्टूबर की रात 11:51 बजे आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से GSLV-F18 रॉकेट के जरिए नेविगेशन सैटेलाइट NVS-03 लॉन्च करेगा। ISRO ने X पर लिखा, “लॉन्च डे!” और बताया कि लॉन्च का सीधा प्रसारण रात 11:20 बजे से शुरू होगा।

PTI के मुताबिक ISRO ने शुक्रवार सुबह बताया कि लॉन्च का 24 घंटे का काउंटडाउन गुरुवार रात 11:51 बजे शुरू हो गया था और यह आगे बढ़ रहा है। काउंटडाउन के दौरान रॉकेट में ईंधन भरने का काम चल रहा है। लॉन्च सतीश धवन स्पेस सेंटर (SDSC-SHAR) के दूसरे लॉन्च पैड से होगा।
NavIC के लिए क्यों अहम है यह लॉन्च?
NavIC यानी Navigation with Indian Constellation, अमेरिका के GPS की तरह भारत का अपना सैटेलाइट नेविगेशन सिस्टम है। यह भारत और उसकी सीमा से करीब 1,500 किलोमीटर आगे तक के इलाके में लोकेशन, नेविगेशन और सटीक समय की जानकारी देता है। लेकिन फिलहाल यह सिस्टम अपनी पूरी क्षमता में काम नहीं कर पा रहा है।
अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने 29 जुलाई 2026 को लोकसभा में लिखित जवाब में बताया था कि IRNSS-1F का 10 साल का मिशन पूरा होने के बाद NavIC के पास अब तीन ही सैटेलाइट (IRNSS-1B, IRNSS-1I और NVS-01) बचे हैं। बुनियादी पोजिशनिंग सेवा के लिए कम से कम चार सक्रिय सैटेलाइट जरूरी हैं, इसलिए NavIC अभी अकेले दम पर लोकेशन नहीं बता सकता, हालांकि टाइमिंग सेवा चालू है। सरकार ने यह भी कहा था कि ज्यादातर इस्तेमाल में NavIC दूसरे सिस्टम्स के साथ मिलकर चलता है, इसलिए यूजर्स के लिए कोई खतरा नहीं है।
ISRO चेयरमैन डॉ. वी. नारायणन ने गुरुवार को तिरुमला में भगवान वेंकटेश्वर के दर्शन के बाद कहा, “इस लॉन्च के साथ हमारे पास कक्षा में चार सक्रिय नेविगेशन सैटेलाइट होंगे, जिनमें एक स्वदेशी एटॉमिक क्लॉक वाला भी होगा।” उन्होंने बताया कि इन सेवाओं का इस्तेमाल रणनीतिक कामों के अलावा एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया, ट्रेनों की रियल-टाइम ट्रैकिंग, गाड़ियों की निगरानी और नावों-जहाजों के नेविगेशन में होता है।
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NVS-03 में नया क्या है?
ISRO के मुताबिक NVS-03 अगली पीढ़ी की NVS सीरीज का तीसरा सैटेलाइट है, जिसे IRNSS सीरीज की नेविगेशन सेवाओं को जारी रखने के लिए बनाया गया है। इसमें विदेश से खरीदी गई एटॉमिक घड़ियों के साथ स्वदेशी एटॉमिक क्लॉक भी लगी है। The Hindu की रिपोर्ट के मुताबिक यह रुबिडियम एटॉमिक क्लॉक ISRO के स्पेस एप्लिकेशंस सेंटर ने विकसित की है। नेविगेशन में लोकेशन का हिसाब समय की बेहद बारीक गणना पर टिका होता है, इसलिए यह घड़ी सैटेलाइट का दिल मानी जाती है।
दूसरा बड़ा बदलाव सिग्नल में है। पुराने L5 और S बैंड के साथ इसमें L1 सिग्नल भी जोड़ा गया है। The Hindu के मुताबिक L1 बैंड से NavIC आज के आम स्मार्टफोन चिपसेट और वियरेबल डिवाइस के साथ ज्यादा आसानी से काम कर सकेगा। यानी आने वाले समय में फोन और स्मार्टवॉच में देसी नेविगेशन का इस्तेमाल बढ़ने का रास्ता खुलेगा।

रॉकेट और मिशन: अहम आंकड़े
- रॉकेट: GSLV-F18, GSLV की 20वीं उड़ान; ऊंचाई करीब 50 मीटर, लॉन्च के वक्त वजन करीब 420 टन, तीन स्टेज
- तीसरा स्टेज: स्वदेशी क्रायोजेनिक स्टेज CUS15 (लिक्विड हाइड्रोजन और लिक्विड ऑक्सीजन)
- सैटेलाइट का वजन: करीब 2,250 किलो
- कक्षा: जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट (GTO), पृथ्वी से सबसे नजदीकी बिंदु 170 किमी और सबसे दूर 37,023 किमी
- लॉन्च: 30 अक्टूबर, रात 11:51 बजे; लाइव प्रसारण रात 11:20 बजे से ISRO की वेबसाइट और सोशल मीडिया पर
ये आंकड़े ISRO के मिशन ब्रोशर से लिए गए हैं। GTO में पहुंचने के बाद सैटेलाइट अपने इंजन से कक्षा ऊपर उठाएगा। The Hindu के मुताबिक इसकी आखिरी जगह 32.5 डिग्री पूर्व पर जियोसिंक्रोनस कक्षा में होगी।
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NVS-02 की चूक से क्या सीखा?
यह लॉन्च इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि इसी सीरीज का पिछला सैटेलाइट NVS-02 अपनी मंजिल तक नहीं पहुंच पाया था। 29 जनवरी 2025 को GSLV-F15 ने उसे सफलतापूर्वक ट्रांसफर ऑर्बिट में पहुंचा दिया था, लेकिन उसके बाद सैटेलाइट की कक्षा ऊपर नहीं उठाई जा सकी। ISRO की बनाई एपेक्स कमेटी ने जांच में पाया कि कक्षा बढ़ाने वाले इंजन की ऑक्सीडाइजर लाइन के पायरो वाल्व तक ड्राइव सिग्नल नहीं पहुंचा। इसकी सबसे संभावित वजह कनेक्टर के कॉन्टैक्ट का अलग हो जाना बताई गई।
ISRO के मुताबिक कमेटी की सिफारिशें 2 नवंबर 2025 को LVM-3 से लॉन्च हुए CMS-03 सैटेलाइट में लागू की गईं और वहां पायरो सिस्टम ने ठीक काम किया। The Hindu की रिपोर्ट के मुताबिक मिशन रेडीनेस रिव्यू में NVS-03 को इस बार पायरो वाल्व पहले से खुले रखकर उड़ाने की मंजूरी दी गई है, ताकि NVS-02 जैसी कनेक्टर की गड़बड़ी दोबारा आड़े न आए। ISRO ने इस पर अलग से आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है।
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आगे क्या?
सरकार के मुताबिक NavIC के अगले दो सैटेलाइट NVS-04 और NVS-05 भी तैयारी के आखिरी दौर में हैं। अगर NVS-03 तय कक्षा में पहुंचकर काम शुरू कर देता है, तो NavIC फिर चार सक्रिय सैटेलाइट के साथ अपनी पोजिशनिंग सेवा दे सकेगा। जानकारों का मानना है कि पूरे नेटवर्क को लगातार भरोसेमंद बनाने के लिए अभी और सैटेलाइट्स की जरूरत होगी।
अंतरिक्ष अभियानों में लॉन्च का समय मौसम और तकनीकी जांच के हिसाब से बदल भी सकता है। ताजा अपडेट के लिए ISRO की आधिकारिक वेबसाइट और X हैंडल @isro देखें। लॉन्च से जुड़ी हर बड़ी अपडेट हम आप तक पहुंचाते रहेंगे।
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