US Iran Strike: होर्मुज में ईरान के केशम द्वीप पर हमला, तेल फिर $105 पार

अमेरिका में आज मिडटर्म चुनाव की वोटिंग है, और उससे ठीक कुछ घंटे पहले दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री रास्ते पर फिर धमाके गूंजे। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, अमेरिकी सेना ने सोमवार देर रात होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान के केशम द्वीप (Qeshm Island) पर हमला किया। वजह बताई गई: ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने एक अमेरिकी विमान पर मिसाइल दागी थी। खबर बाहर आते ही एशियाई बाजार खुलते ही ब्रेंट क्रूड फिर 105 डॉलर प्रति बैरल के पार चला गया। भारत के लिए यह सिर्फ दूर की जंग नहीं है: इसी रास्ते पर भारतीय नाविक फंसे हैं और यहीं से तय होता है कि पेट्रोल-डीजल कितना महंगा पड़ेगा।

हमला क्यों हुआ? अमेरिका का दावा
तीन अमेरिकी अधिकारियों ने इस कार्रवाई को ‘सीमित’ और ‘रक्षात्मक’ बताया है। एक अधिकारी के शब्दों में, “यह उन ईरानियों के खिलाफ रक्षात्मक कदम था जो अमेरिकी संपत्तियों पर सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें इस्तेमाल कर रहे थे।” एक अन्य अमेरिकी अधिकारी के मुताबिक, IRGC ने होर्मुज के ऊपर एक अमेरिकी विमान पर मिसाइल दागी, जिसके बाद एक अमेरिकी लड़ाकू विमान ने आत्मरक्षा में केशम पर तैनात IRGC के सरफेस-टु-एयर मिसाइल लॉन्चर को तबाह कर दिया।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह इकलौता हमला नहीं था। अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से सामने आया है कि पिछले कुछ हफ्तों में अमेरिका ऐसे कई छोटे हमले चुपचाप कर चुका है, जिन्हें जानबूझकर सार्वजनिक नहीं किया गया, ताकि यह संदेश न जाए कि ईरान के खिलाफ बड़ा सैन्य अभियान फिर शुरू हो गया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने 1 सितंबर के बाद ईरानी सैन्य ठिकानों पर किसी हमले की सार्वजनिक जानकारी नहीं दी थी, और इस हमले पर भी उसने फिलहाल कोई बयान नहीं दिया है।
यह भी पढ़ें: Hormuz Limpet Mine: 27 भारतीयों वाले टैंकर पर चिपकाए 2 बम, इंजन में आग
ईरान का पलटवार: ‘दो अमेरिकी ड्रोन गिराए’
ईरान के सरकारी मीडिया के मुताबिक, केशम द्वीप पर सोमवार शाम और मंगलवार तड़के कई धमाके सुने गए। ये धमाके पास के हेंगाम द्वीप और बंदर अब्बास बंदरगाह शहर तक सुनाई दिए। हालांकि स्थानीय रिपोर्टों में शुरुआत में धमाकों की वजह साफ नहीं बताई गई।
IRGC ने अपने बयान में दावा किया कि उसके एयरोस्पेस फोर्स के इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम ने केशम के दक्षिण में दो अमेरिकी MQM-170 टोही ड्रोन नीचे उतार लिए और होर्मुज के पूर्व में एक MQ-9 ड्रोन को नष्ट कर दिया। एक अमेरिकी अधिकारी ने ड्रोन गिराने के ईरानी दावे को गलत बताया है। दोनों पक्षों के दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
ट्रंप: ‘कोई जंग नहीं चल रही’, पर एक घंटे वाली धमकी भी
हमले की खबर से कुछ ही घंटे पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पत्रकारों से पूछे जाने पर कहा था कि वे मिडटर्म के बाद ईरान पर हमले दोबारा शुरू करने के बारे में नहीं सोच रहे। फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा, “हम जंग नहीं लड़ रहे… यह बहुत सॉफ्ट वॉर है। कोई जंग नहीं चल रही। अगर उन्होंने डील नहीं की तो हो सकती है, लेकिन वे बहुत बुरी तरह डील करना चाहते हैं।”
लेकिन उसी इंटरव्यू में ट्रंप ने ईरान के संदिग्ध भूमिगत परमाणु ठिकाने ‘पिकैक्स माउंटेन’ पर हमले का इशारा भी किया: “यह कोई बड़ी बात नहीं है। हम इसे सचमुच एक घंटे में कर सकते हैं, जब चाहें।” उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि ईरान के साथ बातचीत में “कुछ प्रगति जरूर हुई है” और राष्ट्रपति और वे दोनों समझौते की संभावना को लेकर “काफी अच्छा” महसूस कर रहे हैं।
दूसरी तरफ ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि मध्यस्थों के जरिए अमेरिका से “बेहद गहन” बातचीत चल रही है, लेकिन तेहरान कूटनीति और सैन्य, दोनों हालात के लिए “पहले से कहीं ज्यादा” तैयार है। ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई शनिवार को ही चेतावनी दे चुके हैं कि किसी बड़े नए हमले का जवाब “भौगोलिक सीमाओं के बिना” दिया जाएगा। कतर दोनों देशों को फिर सीधी बातचीत की मेज पर लाने की कोशिश में जुटा है।

यह भी पढ़ें: Indian Navy: अरब सागर में लुटेरों से छुड़ाए 20 नाविक, 48 घंटे चला ऑपरेशन
भारत के लिए क्यों बजी घंटी?
पहला मोर्चा: तेल। जंग से पहले होर्मुज से रोज करीब 2 करोड़ बैरल तेल गुजरता था, यानी दुनिया के कच्चे तेल और गैस की करीब पांचवीं हिस्सेदारी। फरवरी में शुरू हुई जंग के बाद यहां ट्रैफिक बुरी तरह सिमट चुका है। सोमवार को शांति वार्ता की उम्मीद में ब्रेंट क्रूड 7.6% टूटकर 104.77 डॉलर पर बंद हुआ था, लेकिन केशम हमले की खबर के बाद मंगलवार सुबह यह फिर 105.25 डॉलर पर पहुंच गया। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए तेल का हर डॉलर सीधे महंगाई, रुपये और सरकारी खजाने पर असर डालता है।
राहत की बात यह रही कि मंगलवार सुबह भारतीय शेयर बाजार ने इस खबर को ज्यादा तवज्जो नहीं दी। BSE सेंसेक्स करीब 596 अंक की बढ़त के साथ 76,288.65 पर और निफ्टी 141 अंक ऊपर 23,582.25 पर खुला। बाजार फिलहाल सोमवार की तेल गिरावट और कूटनीति की उम्मीद पर दांव लगा रहा है।
दूसरा मोर्चा: भारतीय नाविक। केंद्रीय जहाजरानी सचिव विजय कुमार ने 8 अक्टूबर को बताया था कि पश्चिम एशिया संकट शुरू होने के बाद से 11 भारतीय नाविकों की मौत हो चुकी है, 4,292 को सुरक्षित वापस लाया गया है और उस वक्त भी 139 भारतीय नाविक होर्मुज में फंसे थे। तब स्ट्रेट में 2 भारतीय झंडे वाले और 6 भारत आने वाले जहाज मौजूद थे। मंत्रालय के मुताबिक, भारतीय झंडे वाले जहाजों पर 4 हमले हुए और ऐसे 74 मामले सामने आए जिनमें विदेशी झंडे वाले जहाजों पर भारतीय क्रू सवार था। महानिदेशालय (DGMA) का 24 घंटे चलने वाला कंट्रोल रूम इस इलाके के हर भारतीय जहाज और नाविक पर नजर रखता है।
यह भी पढ़ें: Navy Corvette Deal: नौसेना को 8 देसी युद्धपोत, ₹53,866 करोड़ का करार
अब नजर मिडटर्म के बाद पर
केशम द्वीप बंदर अब्बास से करीब 22 किलोमीटर दूर होर्मुज के मुहाने पर बसा है, और इस जंग में यहां से पहले भी शिपिंग पर हमले होते रहे हैं। अमेरिका इसे पहले भी निशाना बना चुका है। हमले थमने के बावजूद ईरान टैंकरों और मालवाहक जहाजों को निशाना बनाकर स्ट्रेट पर अपनी ‘नाकेबंदी’ जारी रखे हुए है। अब बड़ा सवाल यही है: क्या यह ‘रक्षात्मक’ हमला वोटिंग के बाद किसी बड़े अभियान की आहट है, या कतर की मेज पर बन रही डील से पहले का आखिरी दबाव? जवाब जो भी हो, उसका असर भारत के पेट्रोल पंप से लेकर होर्मुज में फंसे नाविकों के घर तक पहुंचेगा।
यह खबर अमेरिकी अधिकारियों के बयानों, IRGC के आधिकारिक बयान, ईरान के सरकारी मीडिया, अमेरिकी राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और ईरानी विदेश मंत्री के सार्वजनिक बयानों, भारत के जहाजरानी मंत्रालय की ब्रीफिंग और बाजार के आंकड़ों पर आधारित है। हमले की खबर सबसे पहले वॉल स्ट्रीट जर्नल ने दी। नई जानकारी आने पर खबर अपडेट की जाएगी।
यह भी पढ़ें: Israel Election: आखिरी सर्वे में नेतन्याहू-आइजनकोट दोनों बहुमत से दूर






