बांग्लादेश में फिर भारत विरोधी नारे, तारिक सरकार के खिलाफ सड़क पर उतरी NCP

मंच से आवाज उठी, “दिल्ली नहीं…” और हजारों की भीड़ ने जवाब दिया, “ढाका, ढाका!” बांग्लादेश की राजधानी में यह नारा एक बार फिर लौट आया है। लेकिन इस बार निशाने पर सिर्फ भारत नहीं, बल्कि वहां की अपनी चुनी हुई सरकार भी है, जिसकी कमान प्रधानमंत्री तारिक रहमान के हाथ में है।
शुक्रवार, 30 अक्टूबर की दोपहर ढाका के शाहबाग में नेशनल म्यूजियम के सामने नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) ने ‘गणविक्षोभ समावेश’ यानी जन-विरोध रैली की। रैली NCP की ढाका उत्तर और दक्षिण इकाइयों ने मिलकर बुलाई थी। स्थानीय रिपोर्ट्स के मुताबिक कई हजार नेता-कार्यकर्ता जुटे, म्यूजियम के सामने का चौक और आसपास की सड़कें भर गईं। फरवरी के आम चुनाव के बाद यह पार्टी का सबसे बड़ा सड़क कार्यक्रम बताया जा रहा है।

दो मंत्रियों का इस्तीफा, वरना PM का घेराव
NCP संयोजक और संसद में विपक्ष के चीफ व्हिप नाहिद इस्लाम ने अपने समापन भाषण में सीधे दो मंत्रियों को कठघरे में खड़ा किया: गृह मंत्री सलाहुद्दीन अहमद और बिजली, ऊर्जा व खनिज संसाधन मंत्री इकबाल हसन महमूद टुकू। नाहिद ने कहा, “ये दोनों मंत्री अपने-अपने क्षेत्र में विफल रहे हैं। अगर वे इस्तीफा नहीं देते, तो हम पूरे देश में जुलूस निकालेंगे। उन जुलूसों के साथ हम तारिक रहमान का घेराव करेंगे और अपनी मांगें मनवाकर रहेंगे।”
गृह मंत्री पर उन्होंने सबसे तीखा हमला किया। नाहिद के मुताबिक कानून-व्यवस्था बिगड़ने की सबसे बड़ी जिम्मेदारी सलाहुद्दीन अहमद की है, जो गृह मंत्रालय छोड़कर संविधान संशोधन के काम में व्यस्त हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जुलाई चार्टर पर हुए जनमत संग्रह के नतीजे को नजरअंदाज कर संविधान में ‘काट-छांट’ कर रही है। नाहिद ने कहा, “देश में बिजली नहीं है, गैस नहीं है। महंगाई और लूटपाट ने सबका जीना मुश्किल कर दिया है।”
उन्होंने BNP सरकार पर ‘नई तानाशाही’ की राह बनाने का आरोप भी लगाया और कहा, “हमने एक तानाशाह को हटाया, अब एक नई तानाशाही का उदय देख रहे हैं।” रैली में ढाका उत्तर और दक्षिण नगर निगम चुनाव के लिए NCP के उम्मीदवार आसिफ महमूद शोजिब भुइयां और नासिरुद्दीन पटवारी भी अलग-अलग जुलूस लेकर पहुंचे।
NCP की चार मांगें
- गृह और ऊर्जा मंत्री का इस्तीफा
- संविधान संशोधन समिति को भंग कर जनमत संग्रह के मुताबिक ‘संविधान सुधार परिषद’ का गठन
- मानवाधिकार और अभिव्यक्ति की आजादी के खिलाफ कानूनों की वापसी, साइबर सुरक्षा कानून में प्रस्तावित बदलाव रद्द हों
- जुलाई 2024 के नरसंहार से जुड़े मुकदमे पूरे कर फैसले लागू हों
असल गुस्सा: महंगाई और अंधेरा
नारों के शोर के पीछे की असली वजह आम लोगों की जेब और घरों की बत्ती है। पश्चिम एशिया में उथल-पुथल के बाद आयातित गैस और ईंधन की सप्लाई पर असर पड़ा है, जिससे बांग्लादेश महीनों से बिजली कटौती और गैस की कमी झेल रहा है। इसका असर उसकी रीढ़ माने जाने वाले गारमेंट उद्योग तक पहुंचा है। विश्व बैंक के अनुमान के मुताबिक 2026 में महंगाई करीब 8.5 फीसदी के आसपास बनी हुई है। NCP इसी नाराजगी को सड़क पर उतारने की कोशिश में है।
‘दिल्ली नहीं, ढाका’ का इतिहास
यह नारा नया नहीं है। 2019 में भारत के साथ समझौतों की आलोचना करने वाले BUET छात्र अबरार फहद की हत्या के बाद हुए प्रदर्शनों में यह पहली बार जोर से उठा था। नाहिद इस्लाम खुद पहले कह चुके हैं कि यही नारा जुलाई 2024 के आंदोलन में फिर गूंजा, जिसके बाद शेख हसीना की सरकार गिरी। दिसंबर 2025 में इंकलाब मंच के नेता शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद शाहबाग में भी यही नारे लगे थे।
स्थानीय रिपोर्ट्स और सोशल मीडिया पर आए वीडियो के मुताबिक शुक्रवार की रैली में भी NCP नेताओं ने यह नारा लगवाया और भीड़ ने ‘ढाका, ढाका’ से जवाब दिया। अपने भाषण में नाहिद ने भारत-बांग्लादेश सीमा पर हत्याओं, असम और पश्चिम बंगाल में मुसलमानों के उत्पीड़न और दिल्ली में मस्जिदें गिराने की योजना जैसे आरोप भी उठाए। इन आरोपों के समर्थन में कोई सबूत सामने नहीं रखा गया।
भारत के लिए इसके क्या मायने?
फरवरी में BNP की सरकार बनने के बाद ढाका की सत्ता की तरफ से भारत-विरोधी बयानबाजी काफी धीमी पड़ी थी और दोनों देश रिश्तों को फिर पटरी पर लाने में लगे हैं। अब संसद में मुख्य विपक्षी आवाज बन चुकी NCP अगर महंगाई के मुद्दे के साथ भारत-विरोध को जोड़ती है, तो तारिक रहमान सरकार पर दबाव बढ़ेगा कि वह नई दिल्ली के साथ किसी भी समझौते में ‘नरम’ न दिखे।
सबसे अहम कसौटी है गंगा जल बंटवारा संधि, जो दिसंबर 2026 में खत्म हो रही है। फरक्का बैराज पर सूखे के मौसम में पानी के बंटवारे वाली यह 30 साल पुरानी संधि दोनों देशों के लिए संवेदनशील है। नाहिद ने रैली में चेतावनी दी कि अगर नए समझौते में बांग्लादेश को ‘वाजिब हिस्सा’ नहीं मिला तो लोग सड़कों पर उतरेंगे। यानी आने वाले हफ्तों में ढाका की सड़कों का मूड सीधे नई दिल्ली की कूटनीतिक मेज तक असर डाल सकता है।
रैली में NCP सांसद हसनात अब्दुल्लाह भी मौजूद रहे, जो पहले भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को लेकर दिए बयान से विवादों में रह चुके हैं। खबर लिखे जाने तक गृह मंत्री सलाहुद्दीन अहमद, ऊर्जा मंत्री या प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से NCP की मांगों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी, और न ही भारत के विदेश मंत्रालय ने इन नारों पर कुछ कहा है।
यह खबर NCP संयोजक नाहिद इस्लाम के रैली में दिए भाषण, पार्टी की ओर से जारी मांगों और स्थानीय रिपोर्ट्स पर आधारित है।






