Kedartal Trek: बर्फ में 5 दिन से लापता 8 ट्रेकर, टेंट मिला पर कोई नहीं

उत्तराखंड के उत्तरकाशी में गंगोत्री से ऊपर, करीब 4,000 मीटर की ऊंचाई पर बर्फ से ढकी एक संकरी घाटी। वहां एक टेंट खड़ा है, कुछ बैग पड़े हैं, सामान बिखरा है… लेकिन उन्हें इस्तेमाल करने वाला कोई नहीं। केदारताल ट्रेक पर 29 अक्टूबर से लापता 7 ट्रेकर और उनका एक स्थानीय गाइड पांच दिन बाद भी नहीं मिले हैं। लापता लोगों में 5 पश्चिम बंगाल के बांकुड़ा और 2 उत्तर प्रदेश के हैं। सोमवार को बचाव दल उनके टेंट तक तो पहुंच गया, पर किसी का सुराग नहीं लगा। अब पूरी उम्मीद आज, मंगलवार के मौसम पर टिकी है।

सोमवार को टेंट मिला, लोग नहीं
उत्तराखंड SDRF के कमांडेंट अर्पण यदुवंशी के मुताबिक, सोमवार को सर्च टीम केदारखड़क-कच्ची ढांग इलाके में पहुंची। उन्होंने बताया, “आज सर्च हुई। वहां हमें टेंट और उनका सामान मिला, लेकिन कोई व्यक्ति नहीं मिला।” उसी दिन हेलिकॉप्टर से हवाई रेकी भी की गई, पर उससे भी कोई नया संकेत नहीं मिला।
सोमवार को SDRF के 6 और नेहरू पर्वतारोहण संस्थान (NIM) के 4 जवानों की 10 सदस्यीय माउंटेन रेस्क्यू टीम को हेलिकॉप्टर से केदारताल घाटी में उतारा गया। दूसरी ओर गंगोत्री नेशनल पार्क और ट्रेकिंग एसोसिएशन की 9 सदस्यीय टीम ने भोजखड़क से केदारखड़क तक का रास्ता छाना। जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र (DEOC) की सोमवार शाम की रिपोर्ट के मुताबिक, बिगड़ते मौसम के चलते ऑपरेशन रोकना पड़ा और टीमें बेस कैंप में ही रुकी हैं।
यह भी पढ़ें: जोशीमठ में हेलिकॉप्टर क्रैश: बदरीनाथ-फाटा हेली में 6 सवार, तलाश तेज
3 दिन का ट्रेक, जो 7 दिन का इंतजार बन गया
गंगोत्री नेशनल पार्क प्रशासन के अधिकारियों के मुताबिक, इस दल को 26 अक्टूबर को तीन दिन के ट्रेक की अनुमति मिली थी। दल 27 अक्टूबर को गंगोत्री से निकला और 29 अक्टूबर तक इसे लौटना था। इसमें 7 ट्रेकर, एक गाइड और कुली व रसोइए समेत सहायक स्टाफ था।
यहीं कहानी का सबसे चुभने वाला मोड़ है। गंगोत्री नेशनल पार्क के उप निदेशक मयंक गर्ग के मुताबिक, 27 अक्टूबर को सुबह करीब 10:30-11 बजे प्रशासन को 29 अक्टूबर के खराब मौसम का अलर्ट मिला। लेकिन तब तक दल ट्रेक पर निकल चुका था और उससे संपर्क करके चेतावनी पहुंचाना मुमकिन नहीं हो सका।
29 अक्टूबर को भारी बर्फबारी हुई और हिमस्खलन ने लौटने का रास्ता बंद कर दिया। 30 अक्टूबर की सुबह ट्रेकिंग एजेंसी ने प्रशासन को सूचना दी कि दल फंस गया है। 31 अक्टूबर को 3 कुली और एक रसोइया हिमस्खलन वाले हिस्से से नीचे कच्ची ढांग के पास सुरक्षित मिल गए, लेकिन बाकी 8 का कुछ पता नहीं चला।

कौन हैं लापता 8 लोग?
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने सोमवार शाम बांकुड़ा के पांच युवकों के नाम बताए: रिंटू मंडल, उदय घोष, रतन घोष, तपस बाउरी और मनोज खवास। उत्तर प्रदेश की दो महिलाएं वर्तिका वर्मा और दीपिका वर्मा भी दल में थीं। दल का गाइड सिद्धार्थ राणा (25) उत्तरकाशी का ही रहने वाला है। जिला प्रशासन ने सभी 8 लोगों के परिवारों से संपर्क करके उन्हें हालात की जानकारी दी है।
मुख्यमंत्री अधिकारी के मुताबिक, बंगाल सरकार उत्तराखंड सरकार और SDRF के लगातार संपर्क में है। दिल्ली में बंगाल के रेजिडेंट कमिश्नर कार्यालय के अलावा राज्य के ADG (कानून-व्यवस्था) और बांकुड़ा के SP को उत्तराखंड के अधिकारियों से चौबीसों घंटे तालमेल की जिम्मेदारी दी गई है।
यह भी पढ़ें: Cyclone Murasu: ओंगोल के पास तट से टकराया तूफान, 120 KMPH हवा और भारी बारिश
10-12 जगह हिमस्खलन, संकरी घाटी बनी सबसे बड़ी दीवार
बचाव दल के सामने पहाड़ जैसी चुनौतियां हैं। मयंक गर्ग के मुताबिक, रास्ते में करीब 10-12 जगहों पर हिमस्खलन हो चुका है। सूखी ढांग के पास का हिमस्खलन प्रभावित हिस्सा एंट्री पॉइंट से पैदल 11-12 किलोमीटर है, जबकि हवा में सीधी दूरी सिर्फ 5.5 से 6 किलोमीटर। पैदल पहुंचने की शुरुआती कोशिशें बर्फ और हिमस्खलन के खतरे के चलते बीच में छोड़नी पड़ीं। उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (UCADA) के हेलिकॉप्टर ने SDRF टीम के साथ हफ्ते के अंत में कई सॉर्टी उड़ाईं, पर नतीजा नहीं निकला।
उत्तरकाशी के जिलाधिकारी प्रशांत आर्य इस ऑपरेशन को पिछले महीने के कालिंदी खाल रेस्क्यू से कहीं ज्यादा मुश्किल बताते हैं। उनके मुताबिक, कालिंदी खाल में जगह खुली और चौड़ी थी, हेलिकॉप्टर उतर सकता था और फंसे लोगों को ऊपर से देखना आसान था। केदारताल में घाटी संकरी है। डीएम के मुताबिक, आज सुबह से 10 सदस्यीय टीम फिर तलाश शुरू करेगी और गंगोत्री नेशनल पार्क की टीम नीचे से ऊपर की ओर बढ़ते हुए उन खोह और गुफाओं को खंगालेगी, जहां कोई जान बचाने के लिए शरण ले सकता है। मंगलवार को मौसम साफ रहने की उम्मीद है और जरूरत पड़ी तो और टीमें भी लगाई जाएंगी।
एजेंसी का सवाल: क्या देर हुई?
दल को ले जाने वाली ट्रेकिंग एजेंसी Soul Seekers के सौरव पंवार का दावा है कि एजेंसी ने 30 अक्टूबर की सुबह प्रशासन को सूचना दे दी थी, लेकिन हेलिकॉप्टर से बचाव 31 अक्टूबर की देर शाम शुरू हो सका। उनका कहना है कि जल्दी कोशिश होती तो दल को सुरक्षित लाने की संभावना बेहतर होती। एजेंसी की अपनी टीम फंसे दल के टेंट तक करीब एक किलोमीटर दूर पहुंच गई थी, लेकिन गहरी बर्फ और दोबारा हिमस्खलन के खतरे के चलते उसे लौटना पड़ा। प्रशासन का कहना है कि अलर्ट मिलने तक दल ट्रेक पर निकल चुका था और खराब मौसम व हिमस्खलन ने पैदल और हवाई, दोनों तरह की कोशिशों को बार-बार रोका।
गंगोत्री इलाके में आने वाले ज्यादातर ट्रेकर, करीब 95 प्रतिशत, गोमुख रूट चुनते हैं। करीब 4,750 मीटर ऊंची केदारताल झील तक जाने वाले इस कम भीड़ वाले रास्ते पर निगरानी भी कम रहती है। अब सवाल यही है कि नवंबर की दहलीज पर ऊंचे हिमालय में ट्रेक की इजाजत और मौसम अलर्ट के बीच का यह फासला कैसे कम हो।
यह भी पढ़ें: Indian Navy: अरब सागर में लुटेरों से छुड़ाए 20 नाविक, 48 घंटे चला ऑपरेशन
यह खबर उत्तराखंड SDRF, उत्तरकाशी जिला प्रशासन, जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र (DEOC) और गंगोत्री नेशनल पार्क के अधिकारियों के बयानों, पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री के आधिकारिक बयान और ट्रेकिंग एजेंसी के बयान पर आधारित है। तलाश से जुड़ी नई जानकारी आने पर खबर अपडेट की जाएगी।
यह भी पढ़ें: Delhi AQI 324: दिल्ली-NCR में GRAP-2 लागू, तंदूर-जनरेटर पर सख्ती






