नवम्बर 3, 2026
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Choti Diwali 2026 Kab Hai: 7 या 8 नवंबर? जानें नरक चतुर्दशी स्नान मुहूर्त

छोटी दिवाली 2026: गोवा में नरकासुर का पुतला

दीपोत्सव के कैलेंडर में इस बार एक दिलचस्प पेच है। छोटी दिवाली 2026 कब है (Choti Diwali 2026 Kab Hai), 7 या 8 नवंबर? द्रिक पंचांग के अनुसार नरक चतुर्दशी यानी छोटी दिवाली रविवार, 8 नवंबर को है और उसी दिन शाम को बड़ी दिवाली की लक्ष्मी पूजा भी होगी। नई दिल्ली में नरक चतुर्दशी का अभ्यंग स्नान सुबह 5:41 से 6:38 बजे तक रहेगा। लेकिन इससे ठीक एक रात पहले, शनिवार 7 नवंबर को काली चौदस और हनुमान पूजा है। यानी चतुर्दशी के पर्व दो दिन में बंटे हैं। पूरा हिसाब नीचे है।

छोटी दिवाली 2026: गोवा में नरकासुर का पुतला
गोवा में नरक चतुर्दशी से पहले नरकासुर के विशाल पुतले बनाए जाते हैं, जिन्हें भोर से पहले जलाया जाता है। तस्वीर पणजी की, 2024 (फाइल फोटो: SerChevalerie / Wikimedia Commons, CC0)

Choti Diwali 2026 Date: तिथि और मुहूर्त एक नजर में

  • नरक चतुर्दशी / छोटी दिवाली / रूप चौदस: रविवार, 8 नवंबर 2026
  • अभ्यंग स्नान मुहूर्त (नई दिल्ली): सुबह 5:41 से 6:38 बजे तक (57 मिनट)
  • काली चौदस और हनुमान पूजा: शनिवार, 7 नवंबर 2026
  • काली चौदस मुहूर्त (निशीथ काल, नई दिल्ली): 7 नवंबर रात 11:39 बजे से 8 नवंबर रात 12:31 बजे तक (52 मिनट)
  • चतुर्दशी तिथि शुरू: 7 नवंबर, सुबह 10:47 बजे
  • चतुर्दशी तिथि खत्म: 8 नवंबर, सुबह 11:27 बजे
  • दिवाली लक्ष्मी पूजा: 8 नवंबर, शाम 5:54 से 7:50 बजे तक (नई दिल्ली)

7 या 8 नवंबर? ऐसे समझिए पूरा गणित

चतुर्दशी तिथि 7 नवंबर सुबह 10:47 बजे शुरू होकर 8 नवंबर सुबह 11:27 बजे तक रहेगी। उलझन यहीं से शुरू होती है, क्योंकि चतुर्दशी से जुड़े दो अलग पर्व अलग-अलग समय देखकर तय होते हैं।

नरक चतुर्दशी का स्नान चंद्रोदय के बाद और सूर्योदय से पहले, चतुर्दशी तिथि रहते किया जाता है। 7 नवंबर की सुबह तक चतुर्दशी शुरू ही नहीं हुई होगी, जबकि 8 नवंबर की भोर में चतुर्दशी मौजूद है। दिल्ली में उस सुबह चंद्रोदय 5:41 बजे और सूर्योदय 6:38 बजे है। इसलिए छोटी दिवाली 8 नवंबर को है।

काली चौदस का फैसला आधी रात यानी निशीथ काल से होता है। 7 नवंबर की आधी रात को चतुर्दशी रहेगी, इसलिए काली चौदस और हनुमान पूजा 7 नवंबर की रात को होगी। द्रिक पंचांग साफ कहता है कि काली चौदस को रूप चौदस और नरक चतुर्दशी से नहीं मिलाना चाहिए, क्योंकि यह कभी-कभी एक दिन पहले पड़ जाती है। इस साल ठीक यही हो रहा है।

8 नवंबर को सुबह 11:27 बजे अमावस्या लग जाएगी और शाम को प्रदोष काल में अमावस्या रहेगी। इसी वजह से इस बार छोटी दिवाली का स्नान और बड़ी दिवाली की लक्ष्मी पूजा एक ही दिन हैं। केंद्र सरकार की 2026 की छुट्टियों की सूची में भी नरक चतुर्दशी (प्रतिबंधित अवकाश) और दिवाली, दोनों 8 नवंबर, रविवार को दर्ज हैं।

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आपके शहर में अभ्यंग स्नान का मुहूर्त (8 नवंबर)

स्नान का समय चंद्रोदय और सूर्योदय पर टिका है, इसलिए हर शहर में अलग है। द्रिक पंचांग की शहरवार गणना:

  • नई दिल्ली: सुबह 5:41 – 6:38 बजे
  • नोएडा: सुबह 5:40 – 6:38 बजे
  • चंडीगढ़: सुबह 5:46 – 6:43 बजे
  • देहरादून: सुबह 5:40 – 6:37 बजे
  • जयपुर: सुबह 5:44 – 6:41 बजे
  • लखनऊ: सुबह 5:23 – 6:21 बजे
  • वाराणसी: सुबह 5:12 – 6:10 बजे
  • पटना: सुबह 5:03 – 6:02 बजे
  • रांची: सुबह 4:59 – 5:58 बजे
  • कोलकाता: सुबह 4:45 – 5:45 बजे
  • भोपाल: सुबह 5:32 – 6:30 बजे
  • इंदौर: सुबह 5:38 – 6:35 बजे
  • अहमदाबाद: सुबह 5:52 – 6:48 बजे
  • मुंबई: सुबह 5:45 – 6:42 बजे
  • पुणे: सुबह 5:40 – 6:37 बजे
  • हैदराबाद: सुबह 5:19 – 6:18 बजे
  • बेंगलुरु: सुबह 5:17 – 6:15 बजे
  • चेन्नई: सुबह 5:06 – 6:05 बजे

रूप चौदस: अभ्यंग स्नान की विधि

नरक चतुर्दशी को रूप चौदस भी कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन सूर्योदय से पहले तेल-उबटन लगाकर नहाने से रूप निखरता है और नरक के कष्टों से मुक्ति मिलती है। द्रिक पंचांग के अनुसार दिवाली के दौरान अभ्यंग स्नान तीन दिन बताया गया है, लेकिन चतुर्दशी का स्नान सबसे अहम माना जाता है।

  • मुहूर्त से पहले उठें। शरीर पर तिल के तेल की मालिश करें।
  • बेसन, हल्दी और तिल के तेल से बना उबटन लगाएं।
  • नहाते समय अपामार्ग (चिचड़ी) की टहनी सिर के ऊपर से तीन बार घुमाने की परंपरा है। इस दौरान यह श्लोक पढ़ा जाता है: “सितालोष्ठसमायुक्तं सकण्टकदलान्वितम्। हर पापमपामार्ग भ्राम्यमाणः पुनः पुनः॥”
  • स्नान के बाद साफ या नए कपड़े पहनें, दक्षिण दिशा की ओर मुंह करके यमराज को जल अर्पित करें और भगवान कृष्ण का स्मरण करें।
  • कई घरों में इस दिन सुबह मंदिर में दीया जलाकर ही दिन की शुरुआत होती है।
नरक चतुर्दशी: श्रीकृष्ण और नरकासुर के युद्ध का पुराना चित्र
भागवत पुराण की करीब 1520-40 की एक चित्रित पांडुलिपि का पन्ना: गरुड़ पर सवार श्रीकृष्ण और सत्यभामा, नरकासुर की सेना से युद्ध (फाइल फोटो: The Metropolitan Museum of Art / Wikimedia Commons, Public Domain)

नरक चतुर्दशी की कथा: जब कृष्ण-सत्यभामा ने किया नरकासुर का अंत

पौराणिक कथा के अनुसार प्राग्ज्योतिषपुर का राजा नरकासुर देवताओं और ऋषियों को सताता था और उसने हजारों कन्याओं को बंदी बना रखा था। कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी को भगवान श्रीकृष्ण ने सत्यभामा के साथ मिलकर उसका वध किया और बंदी कन्याओं को मुक्त कराया। मान्यता है कि मरते समय नरकासुर ने वरदान मांगा कि इस दिन लोग मंगल स्नान करें और दीये जलाएं। तभी से यह दिन नरक चतुर्दशी कहलाया।

गोवा में यह कथा आज भी सड़कों पर जीवित दिखती है। वहां मोहल्ले-मोहल्ले में नरकासुर के बड़े-बड़े पुतले बनते हैं, जिन्हें नरक चतुर्दशी की भोर से पहले जलाया जाता है। दक्षिण भारत में इसी दिन तमिल दीपावली मनाई जाती है, जो इस साल भी 8 नवंबर को है।

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काली चौदस पर हनुमान पूजा: सिंदूर से सजी हनुमान प्रतिमा
सिंदूर, वस्त्र और फूलों से सजी हनुमान जी की लेटी हुई प्रतिमा। काली चौदस की रात हनुमान पूजा की परंपरा है (फाइल फोटो: Mohit07agre / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0)

काली चौदस और हनुमान पूजा: 7 नवंबर की रात

काली चौदस को भूत चतुर्दशी भी कहते हैं। यह खासतौर पर गुजरात और पश्चिमी भारत में मनाई जाती है। मान्यता है कि इस रात बुरी शक्तियां सबसे ताकतवर होती हैं, इसलिए आधी रात को मां काली और हनुमान जी की पूजा कर सुरक्षा और बल की कामना की जाती है। द्रिक पंचांग के अनुसार नई दिल्ली में काली चौदस और दिवाली हनुमान पूजा का मुहूर्त 7 नवंबर रात 11:39 बजे से 12:31 बजे तक है।

  • हनुमान जी को सिंदूर और चमेली का तेल चढ़ाएं, सरसों के तेल का दीया जलाएं।
  • लड्डू या गुड़-चने का भोग लगाएं और हनुमान चालीसा या “ॐ हं हनुमते नमः” का जाप करें।
  • मान्यता है कि इस रात मां काली की आराधना से भय और नकारात्मकता दूर होती है।

द्रिक पंचांग के अनुसार अयोध्या के हनुमानगढ़ी मंदिर में इसी दिन हनुमान जयंती मनाई जाती है, जबकि उत्तर भारत के ज्यादातर लोग हनुमान जयंती चैत्र पूर्णिमा को मनाते हैं। बंगाल की काली पूजा अलग पर्व है, जो अमावस्या की आधी रात को होती है और इस बार 8 नवंबर को है।

छोटी दिवाली पर रंगोली के बीच जलते दीये
रंगोली के बीच जलते दीये। छोटी दिवाली से घर-आंगन रोशन होने लगते हैं (फाइल फोटो: RashmiGhorpade / Wikimedia Commons, CC0)

छोटी दिवाली का दीया: यम के नाम दीपदान कब करें

छोटी दिवाली की शाम घर के बाहर यमराज के नाम दीया जलाने की परंपरा है। मान्यता है कि इससे परिवार अकाल मृत्यु के भय से बचा रहता है। इस बार पंचांग का समीकरण थोड़ा अलग है। चतुर्दशी तिथि 7 नवंबर की शाम को मौजूद रहेगी (दिल्ली में सूर्यास्त शाम 5:32 बजे), जबकि 8 नवंबर की शाम तक अमावस्या लग चुकी होगी और लक्ष्मी पूजा होगी। इसलिए जिन घरों में चतुर्दशी की शाम दीपदान होता है, वे 7 नवंबर की शाम सूर्यास्त के बाद यह दीया जला सकते हैं। द्रिक पंचांग में यम दीपम 6 नवंबर, धनतेरस को दर्ज है, इसलिए अपनी पारिवारिक परंपरा के हिसाब से दिन चुनें।

  • आटे या मिट्टी का चौमुखा दीया लें, उसमें सरसों का तेल डालें।
  • घर के मुख्य द्वार के बाहर दीया रखें, लौ दक्षिण दिशा की ओर हो।
  • कई परिवारों में चतुर्दशी पर 14 दीये जलाने की भी परंपरा है, जो घर के कोनों, रसोई, पानी की जगह और आंगन में रखे जाते हैं।

इसके बाद 8 नवंबर की शाम दिल्ली में लक्ष्मी पूजा का मुहूर्त 5:54 से 7:50 बजे तक है। फिर 10 नवंबर को गोवर्धन पूजा, 11 नवंबर को भाई दूज और 13 नवंबर को नहाय-खाय से छठ महापर्व की शुरुआत होगी।

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यह लेख द्रिक पंचांग की शहरवार गणना, केंद्र सरकार की 2026 की छुट्टियों की सूची और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। मुहूर्त स्थान के हिसाब से बदल सकता है, स्थानीय पंडित से भी पुष्टि कर लें।

Choti Diwali 2026 Kab Hai: 7 या 8 नवंबर? जानें नरक चतुर्दशी स्नान मुहूर्त

Choti Diwali 2026 Kab Hai: 7 या

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