Scotch Whisky Probe: भारत-UK डील पर पहला बड़ा टकराव, देसी कंपनियां भी कूदीं

भारत और ब्रिटेन के बीच जिस ऐतिहासिक व्यापार समझौते को स्कॉच व्हिस्की के लिए सबसे बड़ी खुशखबरी बताया गया था, उसी व्हिस्की पर अब पहला बड़ा टकराव खड़ा हो गया है। अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी रॉयटर्स की पड़ताल के मुताबिक, केंद्र सरकार ने देश की बड़ी शराब कंपनियों से साफ कह दिया है कि टैंकरों और कंटेनरों में थोक (बल्क) में आने वाली स्कॉच को समझौते में मिली टैक्स छूट का फायदा नहीं मिलेगा। यही बल्क स्कॉच Royal Stag, Blenders Pride और McDowell’s जैसे देश के कई लोकप्रिय ब्रांड बनाने में इस्तेमाल होती है।

मामला अब सिर्फ विदेशी कंपनियों तक सीमित नहीं रहा। Diageo और Pernod Ricard के बाद अब देसी शराब कंपनियों का संगठन भी इस मुद्दे पर सरकार के दरवाजे पहुंच गया है। रॉयटर्स के मुताबिक, वाणिज्य मंत्रालय के शीर्ष अधिकारी सोमवार, 2 नवंबर को देसी और विदेशी शराब कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बंद कमरे में बैठक करेंगे। यह जानकारी बैठक से सीधे जुड़े चार लोगों के हवाले से दी गई है। मंत्रालय ने शनिवार को इस पर कोई टिप्पणी नहीं की।
विवाद की जड़: 150% से 75% वाली छूट
भारत-ब्रिटेन व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौते (CETA) पर जुलाई 2025 में लंदन के पास चेकर्स में दस्तखत हुए थे और यह 15 जुलाई 2026 से लागू हुआ। इसके तहत भारत ने कुछ स्कॉच व्हिस्की पर आयात शुल्क 150% से घटाकर 75% करने पर सहमति दी थी। सालों चली बातचीत में व्हिस्की पर टैक्स सबसे अटकने वाले मुद्दों में रहा था।
पेच यहीं फंसा है। रॉयटर्स के मुताबिक, ब्रिटेन से भारत आने वाली स्कॉच व्हिस्की का करीब 80% हिस्सा (मात्रा के हिसाब से) बल्क में आता है, यानी बोतलों में नहीं बल्कि बड़े कंटेनरों में। कंपनियां इसे यहां दूसरी सामग्री के साथ मिलाकर अपने ब्रांड तैयार करती हैं। जांच अधिकारियों का तर्क है कि घटा हुआ शुल्क इस बल्क स्कॉच कॉन्संट्रेट पर लागू नहीं होता।

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कैसे शुरू हुई जांच?
इस पूरे मामले की परतें 19 अक्टूबर को खुलनी शुरू हुईं, जब रॉयटर्स ने पांच इंडस्ट्री सूत्रों के हवाले से बताया कि राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) यह जांच रहा है कि क्या Pernod Ricard और Diageo ने बल्क स्कॉच के आयात को गलत श्रेणी में दिखाकर कम शुल्क का फायदा उठाया। रिपोर्ट के मुताबिक, टैक्स अधिकारी अचानक दिल्ली के पास Pernod के इंडिया मुख्यालय पहुंचे और अधिकारियों से स्कॉच आयात को लेकर पूछताछ की।
Diageo की भारतीय इकाई United Spirits ने शेयर बाजार को दी जानकारी में बताया था कि 16 अक्टूबर को उसके कई दफ्तरों में अधिकारियों ने ‘इंडस्ट्री-वाइड एक्सरसाइज’ के तहत तलाशी ली। कंपनी ने यह नहीं बताया था कि तलाशी किस मामले में थी। इसके बाद 30 अक्टूबर की एक और फाइलिंग में कंपनी ने बताया कि महाराष्ट्र के स्टेट टैक्स कमिश्नर ने महाराष्ट्र GST कानून की धारा 67 और महाराष्ट्र VAT कानून की धारा 64 के तहत 19 से 29 अक्टूबर तक तलाशी की। इस फाइलिंग में भी तलाशी की वजह नहीं बताई गई है।
कंपनियों का क्या कहना है?
Pernod ने रॉयटर्स को दिए बयान में कहा कि वह DRI के साथ पूरा सहयोग कर रही है और मांगी गई हर जानकारी दे रही है। Diageo ने कहा कि वह भारतीय अधिकारियों के साथ सहयोग कर रही है और हमेशा स्थानीय कानूनों का पालन करती आई है। United Spirits ने अपनी फाइलिंग में कहा है कि उसने तलाशी टीम को सभी दस्तावेज और स्पष्टीकरण दिए और फिलहाल उसके कारोबार या वित्तीय स्थिति पर कोई असर नहीं है। DRI की ओर से इस पर कोई टिप्पणी नहीं आई है।
यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि यह जांच अभी चल रही है। किसी भी कंपनी के खिलाफ अब तक न कोई टैक्स मांग सार्वजनिक हुई है और न कोई आरोप तय हुआ है। सभी कंपनियों का कहना है कि वे कानून का पालन करती हैं।
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गोपनीय चिट्ठी: ‘मेक इन इंडिया’ के खिलाफ जाएगा फैसला
इस खबर का सबसे अहम हिस्सा वह गोपनीय चिट्ठी है, जो कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन अल्कोहलिक बेवरेज कंपनीज (CIABC) ने 27 अक्टूबर को सरकार को लिखी। रॉयटर्स ने पहली बार इसकी जानकारी सार्वजनिक की है। इस संगठन में 8PM बनाने वाली Radico Khaitan और Officer’s Choice बनाने वाली Allied Blenders and Distillers जैसी शेयर बाजार में लिस्टेड देसी कंपनियां शामिल हैं।
चिट्ठी में चेतावनी दी गई है कि अगर भारत में शराब बनाने के लिए मंगाई जाने वाली बल्क स्कॉच को कम शुल्क का फायदा नहीं मिला, तो “इससे अनजाने में तैयार बोतलें (फिनिश्ड प्रोडक्ट) आयात करने को बढ़ावा मिल सकता है।” संगठन ने आगे लिखा है कि “ऐसा नतीजा मेक इन इंडिया के तहत घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को मजबूत करने के मकसद के खिलाफ होगा।” CIABC ने सरकार से तुरंत दखल देने की मांग की है।
दूसरी तरफ Diageo और Pernod का प्रतिनिधित्व करने वाला इंटरनेशनल स्पिरिट्स एंड वाइन्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ISWAI) निजी तौर पर सरकार को आगाह कर चुका है कि बल्क स्कॉच को छूट से बाहर रखने से पूरे समझौते की भावना कमजोर हो सकती है। CIABC और उसकी सदस्य कंपनियों ने रॉयटर्स के सवालों का जवाब नहीं दिया।

आपकी व्हिस्की और देश के बाजार पर क्या असर?
भारत का शराब बाजार करीब 65 अरब डॉलर का है और इसमें Diageo और Pernod Ricard का दबदबा है। रेटिंग एजेंसी Crisil के मुताबिक, देश के आयातित स्पिरिट्स बाजार में ब्रिटेन की हिस्सेदारी करीब 75% है और इसकी बड़ी वजह स्कॉच व्हिस्की है। ब्रिटिश सरकार ने समझौते के वक्त कहा था कि 2022 में भारत को उसका व्हिस्की निर्यात 20 करोड़ पाउंड से ज्यादा का था।
इंडस्ट्री को उम्मीद थी कि शुल्क आधा होने से कारोबार बढ़ेगा। Allied Blenders ने इसी हफ्ते निवेशकों को दिए प्रेजेंटेशन में खुद को देश के सबसे बड़े बल्क स्कॉच आयातकों में से एक बताया और कहा कि समझौते से उसके लग्जरी ब्रांड ज्यादा लोगों तक पहुंच सकेंगे। अगर बल्क स्कॉच पर पुराना शुल्क ही लगता रहा, तो देश में बनने वाले स्कॉच-आधारित ब्रांडों को समझौते का वह फायदा नहीं मिलेगा जिसकी उम्मीद थी। हालांकि किसी कंपनी ने अब तक कीमतों पर असर को लेकर कोई ऐलान नहीं किया है।
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ब्रिटेन भी हरकत में, अब सोमवार की बैठक पर नजर
रॉयटर्स के मुताबिक, ब्रिटेन ने कहा है कि वह इस मुद्दे पर भारत के साथ मिलकर काम कर रहा है और स्कॉटलैंड की सरकार ने भी बल्क स्कॉच के साथ हो रहे बर्ताव का मामला नई दिल्ली के सामने उठाया है। भारत सरकार ने अब तक इस पर सार्वजनिक तौर पर कुछ नहीं कहा है।
आयात शुल्क से जुड़े विवाद भारत में विदेशी निवेशकों के लिए पुराना सिरदर्द रहे हैं। Samsung, LG और Volkswagen जैसी कंपनियां भी ऐसे मामलों में उलझ चुकी हैं, जिनमें सालों बाद बड़ी रकम के बकाया टैक्स की मांग की गई। Pernod पर पहले से कुछ आयात का कम मूल्य दिखाने के आरोप में करीब 31.4 करोड़ डॉलर की बकाया टैक्स मांग का मामला चल रहा है, जिसमें कंपनी किसी भी गड़बड़ी से इनकार करती है। भारतीय अधिकारियों का कहना रहा है कि वे सिर्फ देश का कानून लागू कर रहे हैं। अब सबकी नजर सोमवार की बैठक पर है, जिससे तय होगा कि भारत-ब्रिटेन समझौते का यह पहला बड़ा विवाद सुलझता है या और गहराता है।
यह खबर रॉयटर्स की 31 अक्टूबर और 19 अक्टूबर की विशेष रिपोर्टों, CIABC की चिट्ठी के उद्धृत अंशों, कंपनियों के बयानों और United Spirits की स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग पर आधारित है।
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