गुरुग्राम की सोहना रोड 7वीं बार धंसी! ₹58 करोड़ का इलाज आखिर कहां अटका?

सोहना रोड धंसी, और वो भी सातवीं बार। गुरुग्राम की सबसे व्यस्त सड़कों में शुमार सोहना रोड (NH-248A) पर सुभाष चौक के पास सोमवार, 2 नवंबर की सुबह सड़क अचानक बैठ गई। ऊपर से देखने पर यह बस करीब 2×2 फुट का गड्ढा लगता है, लेकिन NHAI अधिकारियों के मुताबिक सतह के नीचे यह खोखलापन कहीं ज़्यादा चौड़ा है और इसकी अनुमानित गहराई करीब 20 फुट है। जिस सड़क से रोज़ हज़ारों गाड़ियां दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे की ओर जाती हैं, उसके नीचे ज़मीन एक बार फिर खोखली निकली।

सूचना मिलते ही भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और ट्रैफिक पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। गुरुग्राम से सोहना की ओर जाने वाली बाईं लेन बैरिकेड कर बंद कर दी गई, ट्रैफिक मार्शल तैनात किए गए और दो लेन से आवाजाही जारी रखी गई। नतीजा वही जो हर बार होता है: शाम ढलते ही रफ्तार सुस्त, और गड्ढे के पास से गुज़रते वाहन चालकों के मन में हादसे का डर।
ऊपर 2 फुट, नीचे 20 फुट: सड़क के नीचे क्या सड़ रहा है?
असली कहानी सड़क के नीचे दबी है। शीशपाल विहार से सुभाष चौक की तरफ सड़क के नीचे करीब 22 से 25 फुट की गहराई पर मास्टर सीवर लाइन गुज़रती है, जिसमें सेक्टर 45 से 51 तक का सीवेज बहकर बहरामपुर के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट तक जाता है। GMDA अधिकारियों के मुताबिक राजीव चौक से शीशपाल विहार तक की यह लाइन करीब तीन दशक पहले हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (HSVP) ने डाली थी और अब बेहद जर्जर हालत में है। जब यह पाइप टूटता या रिसता है, तो पानी नीचे की मिट्टी बहा ले जाता है और ऊपर की सड़क हवा में लटक जाती है।
NHAI के क्षेत्रीय कार्यालय (दिल्ली) ने 3 नवंबर को X पर साफ किया कि सोहना रोड पर यह सिंकहोल GMDA की भूमिगत सीवर पाइपलाइन में खराबी की वजह से बना है। प्रभावित हिस्से को एहतियातन बैरिकेड किया गया है और पाइपलाइन व सड़क की बहाली के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।

तीन साल, सात गड्ढे
यह कोई इकलौता हादसा नहीं, बल्कि एक पैटर्न है। राजीव चौक से शीशपाल विहार के बीच इसी स्ट्रेच पर स्थानीय रिकॉर्ड के मुताबिक सड़क इन तारीखों पर धंस चुकी है:
- 2024: 18 जून, 30 जून, 2 जुलाई और 24 दिसंबर
- 2025: 18 जून
- 2026: 6 मई (एसडी आदर्श स्कूल के पास, जब निर्माण सामग्री से लदा डंपर गड्ढे में फंस गया था) और अब 2 नवंबर
कुछ स्थानीय रिपोर्ट्स 2023 से गिनती करते हुए इसे आठवीं घटना बता रही हैं। उनके मुताबिक नया गड्ढा मई वाली जगह से महज़ करीब 30 मीटर दूर है। मई में बने करीब 10 फुट चौड़े गड्ढे की वजह से महीनों तक लेन बंद रहीं और मरम्मत के बाद सड़क सितंबर में जाकर पूरी तरह खुली थी। यानी मरम्मत को दो महीने भी नहीं बीते और सड़क ने फिर जवाब दे दिया।
₹58 करोड़ की फाइल का लंबा सफर
सवाल यह नहीं कि सड़क क्यों धंसी, कारण सबको पता है। सवाल यह है कि इलाज इतना लेट क्यों? स्थानीय अधिकारियों और दस्तावेज़ों से सामने आई टाइमलाइन खुद कहानी कहती है:
- जुलाई 2024: सड़क धंसने के बाद GMDA ने सीवर लाइन को CIPP तकनीक से ठीक करने के लिए करीब ₹20 करोड़ का एस्टीमेट बनाया।
- टेंडर रद्द: आवेदक कंपनी ने करीब 35% ज़्यादा रकम पर बोली लगाई। मामला मुख्यमंत्री की उच्चस्तरीय बैठक में पहुंचा और टेंडर रद्द कर नए सिरे से टेंडर के निर्देश दिए गए।
- ज़िम्मेदारी बदली: तय हुआ कि मरम्मत NHAI करेगा और खर्च GMDA उठाएगा। NHAI ने करीब ₹58 करोड़ का एस्टीमेट बनाया, जिसे GMDA ने मंज़ूरी दी।
- 27 मई 2026: NHAI अधिकारियों ने बताया कि मुख्यालय ने ₹58 करोड़ के स्थायी मरम्मत प्रस्ताव को मंज़ूरी दे दी है।
- 5 अक्टूबर 2026: NHAI ने कहा कि टेंडर अवॉर्ड हो चुका है, काम महीने के आखिर तक शुरू होगा और तीन महीने में पूरा होगा।
- 2 नवंबर 2026: स्थायी काम शुरू होने से पहले ही सड़क सातवीं बार धंस गई।
स्थानीय रिपोर्ट्स के मुताबिक इस सीवर लाइन के पुनर्वास का प्रस्ताव सबसे पहले 2017 में आया था, जिसे बाद में घटाकर सिर्फ मैनहोल मज़बूत करने तक सीमित कर दिया गया। तब से HSVP, GMDA और NHAI के बीच फाइलें घूमती रहीं और सड़क बार-बार बैठती रही।
NHAI और GMDA क्या कह रहे हैं?
NHAI के प्रोजेक्ट डायरेक्टर योगेश तिलक ने कहा, “हमने मौके का निरीक्षण किया है। सड़क के नीचे की मुख्य सीवर लाइन टूटने से यह धंसाव हुआ। अब ठेकेदार से सीवर लाइन की स्थायी मरम्मत कराने का फैसला लिया गया है।” उनके मुताबिक पहले सीवर लाइन का बहाव डायवर्ट होगा, नालों की डिसिल्टिंग होगी और फिर राजीव चौक से शीशपाल विहार तक मरम्मत होगी। तिलक का कहना है कि CIPP तकनीक से मरम्मत का टेंडर अवॉर्ड हो चुका है, करीब ₹58 करोड़ की लागत वाला यह काम जल्द शुरू होकर फरवरी तक पूरा होगा और इसके बाद सड़क नहीं धंसेगी।
देरी पर NHAI अधिकारियों का तर्क है कि मानसून में मास्टर सीवर लाइन में पानी का बहाव बहुत ज़्यादा रहता है, इसलिए काम सर्दियों में शुरू करने की योजना थी, जब बहाव घटता है। एक वरिष्ठ NHAI अधिकारी के मुताबिक प्लान दो हिस्सों में है:
- ताऊ देवीलाल स्टेडियम से शीशपाल विहार के बीच करीब 2,700 मीटर पुरानी पाइपलाइन को CIPP (क्योर्ड-इन-प्लेस पाइप) तकनीक से अंदर से नई परत चढ़ाकर दुरुस्त किया जाएगा, ताकि पूरी सड़क खोदनी न पड़े।
- मुख्य कैरिजवे के ठीक नीचे से गुज़र रही करीब 100 मीटर लाइन को नए पाइप के ज़रिए सर्विस रोड पर शिफ्ट किया जाएगा। इसके लिए थोड़े समय के लिए ट्रैफिक डायवर्ट होगा।
- डिसिल्टिंग और बहाव डायवर्ज़न नवंबर में, CIPP काम दिसंबर में शुरू और फरवरी के आखिर तक पूरा करने का लक्ष्य।
GMDA की तरफ से अक्टूबर में एक अधिकारी ने कहा था कि उन्होंने हाईवे अथॉरिटी से मरम्मत में सबसे बेहतर गुणवत्ता का लाइनर इस्तेमाल करने को कहा है। ताज़ा धंसाव पर GMDA का अलग से औपचारिक बयान खबर लिखे जाने तक सामने नहीं आया था; आने पर यह खबर अपडेट की जाएगी।
और भरोसा कौन दिलाएगा?
करीब दो हज़ार करोड़ रुपये की लागत से बना गुरुग्राम-सोहना हाईवे दिल्ली से आने वालों को दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे तक पहुंचाता है। हर धंसाव के बाद गड्ढा भरा जाता है, बैरिकेड हटते हैं और कुछ महीनों में कहानी दोहराई जाती है। सेक्टर 40 के निवासी रमेश कुमार और नवीन वर्मा का कहना है कि जब तक अफसरों पर सख्त कार्रवाई नहीं होगी, सड़क में गड्ढे होते रहेंगे। उनकी मांग है कि उन अधिकारियों की पहचान हो जिनके समय सड़क बनी, और पूछा जाए कि तब नीचे की सीवर लाइन की मूल समस्या पर ध्यान क्यों नहीं दिया गया।
अब NHAI ने फरवरी की डेडलाइन दी है। इससे पहले मई में मंज़ूरी और अक्टूबर में ‘महीने के आखिर तक काम शुरू’ का वादा हो चुका है। गुरुग्राम के लाखों मुसाफिर जानना चाहते हैं कि इस बार डेडलाइन ज़मीन पर उतरेगी या आठवें गड्ढे की खबर पहले आएगी।
यह खबर NHAI के प्रोजेक्ट डायरेक्टर और अधिकारियों के बयानों, NHAI क्षेत्रीय कार्यालय (दिल्ली) के आधिकारिक स्पष्टीकरण, GMDA अधिकारियों, स्थानीय निवासियों, मौके के वीडियो और स्थानीय रिपोर्ट्स पर आधारित है।






