नवम्बर 4, 2026
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CEC विरोध के पीछे ‘विदेशी हाथ’? BJP ने मांगी जांच, कांग्रेस का तीखा पलटवार

BJP राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव भाटिया

BJP विदेशी लिंक आरोप: मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर सड़कों पर उतरे विपक्ष पर अब BJP ने सबसे बड़ा सियासी वार किया है। पार्टी ने मंगलवार, 3 नवंबर को दावा किया कि इस आंदोलन के तार विदेशी संगठनों से जुड़े हैं, और इसकी जांच की मांग कर दी। कांग्रेस ने पलटकर कहा कि यह सब वोट चोरी और चुनाव आयोग की जवाबदेही के असली मुद्दे से ध्यान हटाने की कोशिश है।

BJP राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव भाटिया
BJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव भाटिया (फाइल फोटो)। उन्होंने मंगलवार को दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर विपक्ष के आंदोलन की फंडिंग पर सवाल उठाए। फोटो: Adoreabhi / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0

गौरव भाटिया के 5 बड़े सवाल

दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए BJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव भाटिया ने एक मीडिया स्टिंग ऑपरेशन का हवाला दिया और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर “हिंसा, अराजकता और रिजीम चेंज की राजनीति” को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। The Indian Express की रिपोर्ट के मुताबिक, भाटिया ने ये दावे और सवाल रखे:

  • फंडिंग पर सवाल: भाटिया ने कहा, “शुरुआत में धरना स्थल पर सिर्फ दरियां और टेंट थे, अब वहां एसी, कूलर, पानी, बर्गर और पिज़्ज़ा हैं।” उन्होंने स्टिंग के हवाले से रोज़ाना ₹5 लाख की फंडिंग का दावा किया।
  • विदेशी संगठन: उन्होंने पूछा, “क्या यह पैसा ‘प्रोग्रेसिव इंटरनेशनल’ जैसे संगठनों से आ रहा है, जिन्हें सोनिया गांधी से जोड़ा गया है?”
  • फ्रांस-नेपाल-बांग्लादेश जैसे हालात: भाटिया ने ऐसे बयानों पर सवाल उठाए, जिनमें उनके मुताबिक इन देशों जैसी स्थिति की वकालत की गई।
  • महिलाओं को आगे रखने की रणनीति: उनका आरोप है कि प्रदर्शनों में महिलाओं को आगे रखा जा रहा है, ताकि पुलिस संयम बरते और किसी कार्रवाई को दिल्ली पुलिस की छवि बिगाड़ने में इस्तेमाल किया जा सके।
  • वोट से नहीं, सड़क से सत्ता: भाटिया ने दावा किया कि विपक्ष “वोट से सत्ता हासिल न कर पाने पर हिंसा और अराजकता के ज़रिए रिजीम चेंज” चाहता है।

BJP के इन दावों के समर्थन में अब तक किसी जांच एजेंसी की रिपोर्ट या आधिकारिक दस्तावेज़ सार्वजनिक नहीं हुआ है। पार्टी ने एक निजी चैनल के स्टिंग और विदेशी मीडिया रिपोर्ट को आधार बनाया है।

Fox News रिपोर्ट से शुरू हुई कहानी

यह विवाद पिछले महीने से सुलग रहा है। 20 अक्टूबर को अमेरिकी चैनल Fox News Digital ने ‘Global Chaos Inc’ नाम से एक रिपोर्ट छापी, जिसमें 101 संगठनों के एक नेटवर्क को कई देशों के प्रदर्शनों से जोड़ने का दावा किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, वामपंथी नेटवर्क प्रोग्रेसिव इंटरनेशनल ने 16 अक्टूबर की एक ब्रीफिंग में फ्रांस, स्पेन, भारत और अल्बानिया के प्रदर्शनों को एक साथ रखा था।

इसी रिपोर्ट के बाद 22 अक्टूबर को BJP प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने X पर लिखा कि यह “कांग्रेस के अराजकता और रिजीम चेंज प्लॉट” को उजागर करती है। उन्होंने दावा किया कि राहुल गांधी और सोनिया गांधी ने 10 अप्रैल 2025 को 10 जनपथ पर प्रोग्रेसिव इंटरनेशनल के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की थी। यह मुलाकात कांग्रेस ने खुद उस समय सोशल मीडिया पर साझा की थी, लेकिन इस मुलाकात का भारत के प्रदर्शनों से कोई संबंध होने का सबूत BJP ने अभी तक सार्वजनिक नहीं किया है।

उधर बेंगलुरु में केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने भी 3 नवंबर को आरोप लगाया कि विदेशी फंड वाले NGO और भारत-विरोधी ताकतें SIR (मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण) के खिलाफ अभियान को पैसा दे रही हैं (PTI)।

सड़क पर BJP का जवाबी मोर्चा

आरोपों के साथ-साथ BJP ज़मीन पर भी उतर आई है। पार्टी ने ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ पदयात्राएं शुरू की हैं। मंगलवार को लखनऊ और बरेली में ये यात्राएं निकलीं, बरेली में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा शामिल हुए।

कांग्रेस का पलटवार: ‘अराजकता तो सत्ता पक्ष में बैठी है’

कांग्रेस ने BJP के आरोपों को सिरे से खारिज किया है। पार्टी के मीडिया और प्रचार विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने X पर BJP की पदयात्रा पर तंज कसते हुए लिखा कि INDIA गठबंधन की रैलियों से घबराकर BJP भीड़ जुटाने में लगी है। उन्होंने दिल्ली में छात्रों पर पैलेट फायरिंग, SIR से जुड़ी 50 से ज़्यादा मौतों और मणिपुर हिंसा का हवाला देते हुए लिखा, “भारत में ‘अराजकता’ का सबसे बड़ा स्रोत सड़कों पर नहीं, ट्रेज़री बेंच पर बैठा है।”

कांग्रेस महासचिव (संचार) जयराम रमेश पहले ही विदेशी साजिश वाले दावों को “हताशा और घबराहट” में फैलाया गया झूठ बता चुके हैं। 2 नवंबर को X पर उन्होंने लिखा कि BJP के दुष्प्रचार का मकसद साफ है, “ज्ञानेश कुमार को बचाने के लिए वोट चोरी और चुनाव आयोग की जवाबदेही के असली मुद्दे से देश का ध्यान भटकाना।” रामलीला मैदान की रैली में राहुल गांधी ने भी कहा था, “हम नफरत नहीं फैलाएंगे, प्यार से काम करेंगे, लेकिन संविधान को खत्म नहीं होने देंगे।”

असली लड़ाई किस बात पर है?

विपक्ष का आंदोलन मतदाता सूची के SIR और चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर है। विपक्ष का आरोप है कि इस प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर नाम काटे गए और यह राजनीतिक रूप से प्रेरित है। Hindustan Times के मुताबिक, SIR में अब तक 13 करोड़ से ज़्यादा नाम हटाए जा चुके हैं, जिनमें बड़ी संख्या अनुपस्थित, स्थानांतरित या मृत श्रेणी की है। चुनाव आयोग और सरकार का कहना है कि यह प्रक्रिया डुप्लीकेट और अयोग्य नाम हटाने के लिए है और किसी भी गड़बड़ी से इनकार करते हैं।

1 नवंबर को रामलीला मैदान में INDIA गठबंधन की महारैली में 19 से ज़्यादा दलों के नेता जुटे थे, जिसमें राहुल गांधी, अखिलेश यादव, ममता बनर्जी और तेजस्वी यादव शामिल थे। अब एक तरफ विपक्ष CEC को हटाने की मांग पर अड़ा है, तो दूसरी तरफ BJP आंदोलन की फंडिंग की जांच चाहती है। सवाल यही है कि क्या ‘विदेशी हाथ’ का यह दावा किसी जांच तक पहुंचेगा, या सियासी बयानबाज़ी बनकर रह जाएगा।

यह खबर BJP और कांग्रेस नेताओं के सार्वजनिक बयानों, X पोस्ट और The Indian Express, NDTV, PTI व Hindustan Times की रिपोर्ट्स पर आधारित है। विदेशी फंडिंग और साजिश से जुड़े सभी दावे BJP के आरोप हैं, जिनकी किसी स्वतंत्र एजेंसी ने पुष्टि नहीं की है।

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