Delhi AQI 369: 20 जगह हवा ‘गंभीर’, GRAP-3 से सिर्फ 32 अंक दूर दिल्ली

बुधवार की सुबह दिल्ली ने आंख खोली तो सूरज धुंधली गेंद जैसा था और सांस लेना भारी। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के मुताबिक सुबह 6:05 बजे राजधानी का औसत एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 369 दर्ज हुआ। इससे भी डराने वाली बात यह है कि शहर के 59 में से 20 मॉनिटरिंग स्टेशनों पर हवा ‘गंभीर’ (Severe) श्रेणी में पहुंच गई, यानी AQI 400 के पार। लगातार तीसरे दिन दिल्ली ‘बहुत खराब’ हवा में जी रही है।

CAQM के ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) में दिल्ली का औसत AQI 401 पहुंचते ही स्टेज-3 की श्रेणी शुरू होती है। सुबह का 369 का आंकड़ा उस दहलीज से सिर्फ 32 अंक नीचे है। फिलहाल दिल्ली-NCR में 2 नवंबर से GRAP-2 लागू है।
कहां सबसे जहरीली हवा?
CPCB के स्टेशनों पर सुबह पंजाबी बाग और जहांगीरपुरी, दोनों में AQI 447 रहा। IIT दिल्ली के आसपास 438 और मुंडका में 436 दर्ज हुआ। 20 स्टेशन ‘गंभीर’, 33 ‘बहुत खराब’ और बाकी ‘खराब’ श्रेणी में रहे।
CPCB के आंकड़ों के हवाले से ANI ने सुबह जो रीडिंग जारी कीं, उनमें धौला कुआं 417, इंडिया गेट 414, सुनहरी बाग रोड 414 और गाजीपुर 410 पर रहे। अक्षरधाम के आसपास AQI 305 और आनंद विहार में 297 रहा, जो ‘बहुत खराब’ और ‘खराब’ श्रेणी में आते हैं।
मंगलवार सुबह 8 स्टेशन ‘गंभीर’ श्रेणी में थे। बुधवार सुबह यह संख्या बढ़कर 20 हो गई, यानी एक ही दिन में करीब ढाई गुना।
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5 दिन में 117 से 369: ऐसे बिगड़ी हवा
31 अक्टूबर तक दिल्ली की हवा ‘मध्यम’ थी। CAQM के मुताबिक इसके बाद प्रतिकूल मौसम की वजह से AQI तेजी से चढ़ा और 2 नवंबर को सीजन में पहली बार ‘बहुत खराब’ श्रेणी में पहुंचा।
| तारीख | दिल्ली का AQI | श्रेणी |
|---|---|---|
| 31 अक्टूबर | 117 | मध्यम |
| 1 नवंबर | 261 | खराब |
| 2 नवंबर | 324 | बहुत खराब (GRAP-2 लागू) |
| 3 नवंबर | 350 | बहुत खराब |
| 4 नवंबर (सुबह 6:05 बजे) | 369 | बहुत खराब |
NCR के शहरों में भी हालात अलग-अलग हैं। CPCB के 3 नवंबर के बुलेटिन में गुरुग्राम 305 के साथ ‘बहुत खराब’ श्रेणी में रहा, जबकि नोएडा 291 और गाजियाबाद 235 पर ‘खराब’ श्रेणी में रहे। ग्रेटर नोएडा 189 और फरीदाबाद 106 पर ‘मध्यम’ श्रेणी में थे।

धुआं आ कहां से रहा है?
केंद्र के डिसीजन सपोर्ट सिस्टम (DSS) के अनुमान के मुताबिक दिल्ली के प्रदूषण में सबसे बड़ा हिस्सा वाहनों के धुएं का 15.8% है। ठीक पीछे पराली जलाने का योगदान 15.3% है। घरेलू उत्सर्जन 3.9%, दिल्ली और आसपास के उद्योग 3%, निर्माण कार्य 2.2% और कचरा जलाना 1.4% योगदान दे रहा है। PM2.5 सबसे बड़ा प्रदूषक बना हुआ है।
भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI) की CREAMS लैब के सैटेलाइट आंकड़ों के मुताबिक 2 नवंबर को छह राज्यों में पराली जलाने की 219 घटनाएं दर्ज हुईं। इनमें सबसे ज्यादा पंजाब में 98, राजस्थान में 67 और मध्य प्रदेश में 48 रहीं। 15 सितंबर से अब तक कुल 3,535 घटनाएं दर्ज हो चुकी हैं, जिनमें 1,612 अकेले पंजाब में हैं।
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GRAP-3 लगा तो क्या-क्या बंद होगा?
CAQM के GRAP शेड्यूल (29 सितंबर 2026 का संशोधन) के मुताबिक स्टेज-3 लागू होते ही GRAP-1 और 2 की पाबंदियों के ऊपर ये सख्त कदम जुड़ जाते हैं:
- निर्माण पर ब्रेक: पूरे NCR में खुदाई, पाइलिंग, तोड़फोड़, ईंट-चिनाई, RMC प्लांट, सड़क निर्माण और धूल उड़ाने वाले मटेरियल की ढुलाई पर रोक। रेलवे, मेट्रो, एयरपोर्ट, अस्पताल, हाईवे जैसे जरूरी प्रोजेक्ट को छूट।
- स्टोन क्रशर और खनन बंद: पूरे NCR में।
- पुरानी गाड़ियों पर रोक: दिल्ली और गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत, गाजियाबाद व गौतमबुद्ध नगर में BS-III पेट्रोल और BS-IV डीजल चार पहिया वाहनों पर सख्त पाबंदी। दिव्यांगजनों के लिए खास तौर पर बनी निजी गाड़ियों को छूट।
- डीजल माल वाहन: दिल्ली के BS-IV और उससे पुराने डीजल मीडियम गुड्स वाहनों पर रोक, बाहर से आने वाले ऐसे वाहनों की एंट्री बंद।
- स्कूल: दिल्ली, गुरुग्राम, फरीदाबाद, गाजियाबाद और गौतमबुद्ध नगर में कक्षा 5 तक की पढ़ाई ‘हाइब्रिड’ मोड में।
- दफ्तर: राज्य सरकारें 50% कर्मचारियों के साथ काम और बाकी के वर्क फ्रॉम होम पर फैसला ले सकती हैं।

ध्यान रहे, GRAP का कोई भी स्टेज किसी एक स्टेशन की रीडिंग से नहीं, बल्कि पूरी दिल्ली के औसत AQI और मौसम के पूर्वानुमान के आधार पर CAQM की उप-समिति लागू करती है। अगर पूर्वानुमान में हवा के और बिगड़ने के संकेत हों, तो उप-समिति दहलीज छूने से पहले भी अगला स्टेज लागू कर सकती है।
आगे क्या, दिवाली से पहले राहत मिलेगी?
दिल्ली के एयर क्वालिटी अर्ली वार्निंग सिस्टम का पूर्वानुमान है कि कम से कम शुक्रवार, 6 नवंबर तक हवा ‘बहुत खराब’ बनी रहेगी। बुधवार को अधिकतम तापमान 27-29 डिग्री और न्यूनतम 14-16 डिग्री के बीच रहने का अनुमान है और बारिश की कोई संभावना नहीं है। यानी हवा को साफ करने वाली कोई प्राकृतिक मदद फिलहाल नजर नहीं आ रही, और 8 नवंबर को दिवाली है।
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सेहत पर असर: किसे सबसे ज्यादा खतरा
CPCB के मानकों के मुताबिक ‘बहुत खराब’ हवा में लंबे समय तक रहने से सांस की बीमारियां हो सकती हैं, जबकि ‘गंभीर’ हवा स्वस्थ लोगों पर भी असर डालती है और पहले से बीमार लोगों के लिए गंभीर खतरा बनती है। बच्चे, बुजुर्ग, अस्थमा और दिल के मरीज सबसे ज्यादा जोखिम में हैं।
GRAP के सिटिजन चार्टर में लोगों से अपील की गई है कि छोटी दूरी पैदल या साइकिल से तय करें, निजी गाड़ी की जगह मेट्रो और बस अपनाएं, गाड़ियों का PUC सर्टिफिकेट अपडेट रखें और कचरा या लकड़ी न जलाएं। अपने इलाके का AQI CPCB के SAMEER ऐप पर देखा जा सकता है।
यह खबर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के AQI बुलेटिन, वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) के GRAP आदेश और शेड्यूल, डिसीजन सपोर्ट सिस्टम, IARI की CREAMS लैब और दिल्ली के एयर क्वालिटी अर्ली वार्निंग सिस्टम के आंकड़ों पर आधारित है।
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