नवम्बर 4, 2026
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Voyager 1 Light Day: 18 नवंबर को इतिहास रचेगा NASA का यान, जानें समय

Voyager 1 Light Day की घड़ी अब करीब है। 49 साल पहले धरती से छोड़ा गया NASA का अंतरिक्ष यान वॉयजर 1, बुधवार 18 नवंबर 2026 को धरती से ठीक एक ‘लाइट-डे’ यानी एक प्रकाश-दिवस की दूरी पार कर लेगा। NASA के मुताबिक यह पल अमेरिकी समय (EST) के अनुसार सुबह 5:16:07 बजे आएगा, यानी भारतीय समयानुसार दोपहर 3:46 बजे। इतनी दूर पहुंचने वाली यह इंसान की बनाई पहली चीज होगी।

उस वक्त वॉयजर 1 धरती से 25,902,068,356 किलोमीटर, यानी करीब 2,590 करोड़ किलोमीटर दूर होगा। दूरी इतनी है कि यान से चला रेडियो संदेश, जो रोशनी की रफ्तार से चलता है, धरती तक पहुंचने में पूरे 24 घंटे लेगा।

Voyager 1 Light Day: 1976 में JPL में टेस्टिंग के दौरान NASA का वॉयजर अंतरिक्ष यान
नवंबर 1976 में कैलिफोर्निया की जेट प्रोपल्शन लेबोरेटरी (JPL) में टेस्टिंग के दौरान एक वॉयजर यान (फाइल फोटो)। फोटो: John Gregoire, NASA/JPL / Wikimedia Commons (पब्लिक डोमेन)

लाइट-डे क्या है, यह समय नहीं, दूरी है

नाम सुनकर लगता है कि लाइट-डे समय की कोई इकाई है, लेकिन ऐसा नहीं है। NASA साफ करता है कि यह दूरी का पैमाना है। रोशनी एक सेकंड में करीब तीन लाख किलोमीटर चलती है। वह 24 घंटे में जितनी दूरी तय करती है, उसे एक लाइट-डे कहते हैं। इसी तरह लाइट-ईयर वह दूरी है, जो रोशनी एक साल में तय करती है।

इस दूरी का अंदाजा लगाने के लिए NASA के ये उदाहरण देखिए:

कहां तकरोशनी को कितना समय लगता है
धरती से चांद (औसतन 3,84,400 किमी)करीब 1.3 सेकंड
सूरज से धरती (करीब 15 करोड़ किमी)करीब 8 मिनट 20 सेकंड
धरती से मंगल3 से 22 मिनट (ग्रहों की स्थिति के हिसाब से)
धरती से नेपच्यून (औसतन 450 करोड़ किमी)करीब 4 घंटे 10 मिनट
धरती से वॉयजर 1 (18 नवंबर 2026)पूरे 24 घंटे, यानी 1 लाइट-डे
सबसे नजदीकी तारा प्रॉक्सिमा सेंटॉरीकरीब 4.24 साल

यानी सौरमंडल के आखिरी ग्रह नेपच्यून तक रोशनी चार घंटे में पहुंच जाती है, जबकि वॉयजर 1 उससे करीब छह गुना आगे निकल चुका है।

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1977 में उड़ा था, अब तक भेज रहा है डेटा

वॉयजर 1 को 5 सितंबर 1977 को अमेरिका के केप कैनावेरल से टाइटन-सेंटॉर रॉकेट पर लॉन्च किया गया था। उससे दो हफ्ते पहले इसका जुड़वां यान वॉयजर 2 रवाना हुआ था। दोनों ने उस दुर्लभ ग्रह-संयोग का फायदा उठाया, जो करीब 175 साल में एक बार बनता है, जब बृहस्पति, शनि, यूरेनस और नेपच्यून ऐसी स्थिति में होते हैं कि एक यान एक ग्रह के गुरुत्व के सहारे अगले तक पहुंच सके।

5 सितंबर 1977 को टाइटन-सेंटॉर रॉकेट से वॉयजर 1 का लॉन्च
5 सितंबर 1977: केप कैनावेरल के लॉन्च कॉम्प्लेक्स 41 से टाइटन-सेंटॉर रॉकेट पर वॉयजर 1 की उड़ान (फाइल फोटो)। फोटो: NASA / Wikimedia Commons (पब्लिक डोमेन)

वॉयजर 1 ने बृहस्पति और शनि के पास से गुजरते हुए उनकी और उनके चंद्रमाओं की ऐतिहासिक तस्वीरें भेजीं। फिर यह ग्रहों से दूर सौरमंडल के बाहर की ओर मुड़ गया। लौटते हुए इसी यान ने धरती की वह मशहूर तस्वीर खींची, जिसे ‘पेल ब्लू डॉट’ कहा जाता है, जिसमें पूरी धरती रोशनी की लकीर में एक छोटे से नीले बिंदु जैसी दिखती है।

अगस्त 2012 में वॉयजर 1 ने हीलियोपॉज पार किया, यानी वह सीमा जहां सूरज से निकलने वाली सौर हवा का असर खत्म होता है। इसके साथ यह इंटरस्टेलर स्पेस (तारों के बीच का अंतरिक्ष) में पहुंचने वाला पहला मानव-निर्मित यान बना। NASA के मुताबिक वॉयजर 1 और 2 ही ऐसे यान हैं, जो इस सुरक्षा कवच के बाहर काम कर रहे हैं। वॉयजर 2 ने यह सीमा नवंबर 2018 में पार की थी।

एक मैसेज भेजो, जवाब के लिए दो दिन इंतजार

इतनी दूरी का सीधा असर यान से बातचीत पर पड़ता है। NASA का डीप स्पेस नेटवर्क, जिसके विशाल एंटीना अमेरिका, स्पेन और ऑस्ट्रेलिया में हैं, आज भी वॉयजर 1 को ट्रैक करता है। NASA के अक्टूबर के आखिर में जारी नोट के मुताबिक ऑस्ट्रेलिया के कैनबरा एंटीना ने तब वॉयजर 1 को 25.80 अरब किलोमीटर दूर दर्ज किया था।

एक लाइट-डे की दूरी का मतलब है कि धरती से भेजा गया कोई भी कमांड यान तक पहुंचने में करीब एक दिन लेगा और उसका जवाब लौटने में एक दिन और। यानी एक सवाल का जवाब पाने में करीब दो दिन।

उम्र का असर यान की ताकत पर भी दिख रहा है। वॉयजर 1 को बिजली रेडियोधर्मी प्लूटोनियम से चलने वाले जनरेटर से मिलती है, जिसकी क्षमता हर साल घट रही है। बिजली बचाने के लिए इसके कैमरे 1990 में ही बंद कर दिए गए थे। NASA के ताजा स्टेटस के मुताबिक कॉस्मिक रे उपकरण फरवरी 2025 में और लो-एनर्जी चार्ज्ड पार्टिकल उपकरण 17 अप्रैल 2026 को बंद किया गया। फिलहाल इसका मैग्नेटोमीटर और प्लाज्मा वेव उपकरण चालू हैं, जो तारों के बीच के अंतरिक्ष से वैज्ञानिक जानकारी भेज रहे हैं।

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सुनहरी डिस्क में भारत की आवाज भी

वॉयजर 1 और 2 दोनों में एक ‘गोल्डन रिकॉर्ड’ लगा है, 12 इंच की सोने की परत वाली तांबे की डिस्क, जिसे किसी दूसरी सभ्यता के लिए धरती का संदेश माना जाता है। NASA के मुताबिक इसमें 55 भाषाओं में अभिवादन, 27 संगीत रचनाएं, 116 तस्वीरें और धरती की कई आवाजें दर्ज हैं।

वॉयजर यान पर लगे गोल्डन रिकॉर्ड का कवर
वॉयजर यान पर लगे ‘साउंड्स ऑफ अर्थ’ गोल्डन रिकॉर्ड का कवर, जिस पर रिकॉर्ड चलाने का तरीका और सूरज की स्थिति उकेरी गई है (फाइल फोटो)। फोटो: NASA/JPL / Wikimedia Commons (पब्लिक डोमेन)

भारतीयों के लिए इसमें खास बात है। NASA की सूची के मुताबिक इन 27 रचनाओं में भारत से सुरश्री केसरबाई केरकर का गाया राग ‘जात कहां हो’ शामिल है, जिसकी अवधि 3 मिनट 30 सेकंड है। यानी धरती से सबसे दूर पहुंची इंसानी चीज अपने साथ भारतीय शास्त्रीय संगीत भी लेकर जा रही है। रिकॉर्ड के एल्युमिनियम कवर पर 14 पल्सर तारों के सापेक्ष सूरज की स्थिति और रिकॉर्ड चलाने का तरीका उकेरा गया है।

आगे कहां जा रहा है वॉयजर 1

वॉयजर 1 इस वक्त करीब 61,000 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आगे बढ़ रहा है। NASA के मुताबिक यह उर्सा माइनर तारामंडल के एक तारे ग्लीज 445 की दिशा में है, जो धरती से 17 प्रकाश-वर्ष से ज्यादा दूर है। करीब 40,000 साल बाद यह उस तारे से लगभग 1.7 प्रकाश-वर्ष की दूरी से गुजरेगा। इतनी तेज रफ्तार भी रोशनी के आगे रेंगने जैसी है।

इसका जुड़वां वॉयजर 2, जिसने यूरेनस और नेपच्यून का दौरा किया था, अलग रास्ते पर है। NASA के अनुमान के मुताबिक वह नवंबर 2035 में धरती से एक लाइट-डे दूर पहुंचेगा।

18 नवंबर को अंतरिक्ष में कोई धमाका या आतिशबाजी नहीं होगी। यान चुपचाप अपनी राह पर चलता रहेगा। लेकिन NASA के शब्दों में, यह “किसी भी पैमाने पर एक बड़ी उपलब्धि, और जश्न मनाने लायक दिन” होगा। जिन्हें यह सफर देखना है, वे NASA की वेबसाइट पर ‘Where Are Voyager 1 and 2 Now’ पेज और ‘Eyes on the Solar System’ टूल पर यान की मौजूदा दूरी सेकंड-दर-सेकंड बढ़ते हुए देख सकते हैं।

यह खबर NASA के वॉयजर मिशन पेज, ‘What Is a Light-Day’ व्याख्या, यान के इंस्ट्रूमेंट स्टेटस और NASA नाइट स्काई नेटवर्क के नवंबर नोट में दी गई आधिकारिक जानकारी पर आधारित है।

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Voyager 1 Light Day: 18 नवंबर को

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